शीतला सप्तमी पूजा सामग्री लिस्ट, जानें बसोड़ा व्रत में जरूरी चीजें

Sheetala Saptami 2026: कल 10 मार्च 2026 को शीतला सप्तमी मनाई जाएगी. इस दिन माता शीतला की पूजा, बासी भोजन का भोग और विशेष व्रत से परिवार को रोगों से रक्षा, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.

Sheetala Saptami 2026:  हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष शीतला सप्तमी का पर्व 10 मार्च 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा. इस पर्व को कई स्थानों पर बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन श्रद्धालु माता शीतला का व्रत रखते हैं और विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं.

हालांकि कई क्षेत्रों में शीतला अष्टमी के दिन भी पूजा करने की परंपरा है. जो लोग शीतला अष्टमी की पूजा करते हैं, वे सप्तमी के दिन भोग का भोजन तैयार करते हैं. वहीं जो लोग शीतला सप्तमी की पूजा करते हैं, वे षष्ठी तिथि को ही माता के लिए भोग बना लेते हैं. इस वर्ष शीतला सप्तमी के लिए भोग 9 मार्च 2026 को तैयार किया जाएगा.

शीतला सप्तमी पर क्यों नहीं जलता चूल्हा

शीतला सप्तमी और अष्टमी की पूजा में एक विशेष परंपरा निभाई जाती है. मान्यता है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाना चाहिए और न ही ताजा भोजन बनाना चाहिए.

इसलिए पूजा से एक दिन पहले ही भोजन तैयार कर लिया जाता है और अगले दिन माता शीतला को उसी बासी भोजन का भोग लगाया जाता है. माना जाता है कि इससे घर में शीतलता, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि बनी रहती है.

शीतला माता पूजन सामग्री लिस्ट

शीतला सप्तमी या अष्टमी की पूजा के लिए कुछ विशेष सामग्री का होना जरूरी माना जाता है.

मुख्य पूजन सामग्री इस प्रकार है:

  • पूड़े
  • चने की दाल
  • काले चने
  • बिलौने (कपास)
  • बच्चों के कपड़े
  • माता को चढ़ाने के लिए साड़ी
  • आटा और गुड़
  • कच्चा दूध और जल
  • मीठे चावल
  • पूरी
  • सात कच्ची-पक्की रोटियां
  • सात कच्ची रोटियां
  • माता को अर्पित करने के लिए पैसे
  • बताशे और खील

इन सभी सामग्रियों से माता शीतला की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.

शीतला सप्तमी पर क्या करना चाहिए

इस दिन सुबह स्नान करके माता शीतला की पूजा करनी चाहिए. पूजा के बाद बासी भोजन का सेवन किया जाता है. इसके साथ ही इस दिन दान-पुण्य करना, गरीबों की मदद करना और पशु-पक्षियों को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है.

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शीतला सप्तमी व्रत के लाभ

हिंदू धर्म में शीतला माता की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से चेचक, खसरा, फोड़े-फुंसी और त्वचा संबंधी रोगों से रक्षा होती है. यह व्रत खासतौर पर बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए रखा जाता है. माता शीतला की कृपा से परिवार में सुख, शांति और आरोग्य बना रहता है.

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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