Shab e Barat 2026: आज शब-ए-बारात है और इस रात कब्रिस्तानों में जाकर पूर्वजों की मगफिरत के लिए दुआ करना एक आम परंपरा है. शब-ए-बारात केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन और सुधार का संदेश भी देती है. यह रात इंसान को अपने गुनाहों को स्वीकार कर उनसे तौबा करने, दूसरों को माफ करने और दिल से नफरत निकालने की सीख देती है. आइए जानते हैं शब-ए-बारात के बारे में खास बातें…
Shab-e-Barat 2026 कब है
शब-ए-बारात 2026 इस्लामी कैलेंडर के शाबान महीने की 15वीं (15 Shaban 1447 AH) रात को मनाई जाती है. भारत में शब-ए-बारात 2026 की तिथि 3 फरवरी 2026 (शाम से) से 4 फरवरी 2026 तक होने की संभावना है, लेकिन सटीक तारीख चांद नजर आने के बाद तय होती है. यह 15 शाबान 1447 हिजरी को मेल खाती है.
क्यों है ये ‘माफी की रात’?
भाई, शब-ए-बारात को ‘लैलतुल बरात’ भी बोलते हैं, मतलब बरी होने की रात. इस्लामी मान्यता है कि अल्लाह इस रात कयामत तक के तमाम बंदों के अमल देखता है. जो लोग जागते हैं, नमाज पढ़ते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं, उनकी तौबा कुबूल हो जाती है.
रिवाज देखो तो लोग रात भर इबादत में लगे रहते हैं. घरों में हलवा-खीर बनती है, मस्जिदों में महफिलें सजती हैं. कब्रिस्तान जाकर मरहूम रिश्तेदारों के लिए फातिहा पढ़ना भी आम है. कुछ लोग नफिल रोजा भी रखते हैं. ये सब अल्लाह की रहमत पाने के लिए. मैंने खुद देखा है, गलियों में लाइटें जलती हैं, माहौल भक्ति से भर जाता है. अगर आप भी प्लान कर रहे हो, तो पहले से कुरान की कोई सूरह याद कर लो!
शब-ए-बारात में क्यों जागते हैं लोग
शब-ए-बारात की रात को लोग पूरी रात जागकर इबादत और दुआ करते हैं. माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपनी रहमत और माफी बरसाते हैं. लोग गुनाहों की माफी मांगते हैं, नेक कामों की योजना बनाते हैं और अपने भविष्य के लिए दुआ करते हैं. यह रात आत्म-चिंतन और आध्यात्मिक शुद्धि का समय होती है.
रमजान 2026 कब से शुरू होगा?
शब-ए-बारात के ठीक 15 दिन बाद आता है रमजान का पाक महीना. 2026 में अगर चांद 18 फरवरी को दिखा, तो 19 फरवरी से रोजे शुरू हो जाएंगे. ये तारीख भी चांद पर डिपेंड करती है, UAE या सऊदी अरब के ऐलान से मैच हो सकती है.
रमजान में मुसलमान भाई सुबह सूर्योदय से शाम सूर्यास्त तक खाना-पानी छोड़कर अल्लाह की इबादत करते हैं. ये नेकी का महीना है – कुरान पढ़ना, जकात देना, गरीबों की मदद. भारत में देहरादून, लखनऊ जैसे शहरों में इफ्तार पार्टियां धूम मचाती हैं. रोजे रखने से जज्बा मजबूत होता है, दिल पाक होता है.
