Masik Durga Ashtami: सावन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को सावन मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है. इस साल यह पावन व्रत 20 अगस्त 2026, गुरुवार को रखा जाएगा. भगवान शिव के प्रिय महीने सावन में पड़ने के कारण इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के संकट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. अगर आप भी मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखने जा रहे हैं, तो पूजा से पहले जान लें कि मां दुर्गा की पूजा के लिए किन-किन सामग्री की आवश्यकता होती है.
सावन मासिक दुर्गाष्टमी: पूजन सामग्री की लिस्ट
1. मुख्य सामग्री और स्थापना
- मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर
- लकड़ी की चौकी
- लाल कपड़ा
- गंगाजल और शुद्ध जल
- तांबे या पीतल का कलश
- नारियल
- आम के पत्ते
- रोली और सिंदूर
- अक्षत
- मौली या कलावा
2. अर्पण और श्रृंगार सामग्री
- लाल चुनरी
- 16 श्रृंगार की सामग्री
- लाल कनेर या गुड़हल के फूल
- फूलों की माला
- फल
- पान के पत्ते
- सुपारी
- लौंग
- छोटी इलायची
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3. भोग और धूप-दीप की सामग्री
- शुद्ध देसी घी
- सरसों का तेल
- दीपक
- रुई की बाती
- कपूर
- धूपबत्ती और अगरबत्ती
- केले, सेब आदि ताजे फल
- मेवे
- मिश्री
- खीर या हलवा
सावन मासिक दुर्गाष्टमी: पूजा की संक्षिप्त विधि
- स्नान और शुद्धता: सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें. संभव हो तो लाल या पीले रंग के कपड़े धारण करें, इसे शुभ माना जाता है.
- पूजा स्थल की सफाई: पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. इसके बाद मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें.
- संकल्प लें: हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत एवं पूजा का संकल्प लें.
- पूजन और अर्पण: मां दुर्गा को रोली, अक्षत, सिंदूर और लाल पुष्प अर्पित करें. इसके बाद मां को लाल चुनरी और श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं.
- भोग और पाठ: देसी घी का दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती करें. मां दुर्गा को हलवा, खीर, फल या अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य चीजों भोग लगाएं. इसके बाद दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.
- मंत्र जप: मांता के मंत्रो का जाप करें.
- आरती: पूजा के अंत में कपूर से मां दुर्गा की आरती करें .
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