सावन में केवल शिवजी ही नहीं, इन 6 देवों का आशीर्वाद भी है बेहद जरूरी

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान शिवजी के साथ पूरे शिव परिवार और अन्य प्रमुख देवी-देवताओं की पूजा करने से साधना का महत्व बढ़ जाता है. आइए जानें उन देवताओं के बारे में.

Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान केवल महादेव ही नहीं, बल्कि शिव परिवार और अन्य प्रमुख देवी-देवताओं की पूजा करने से साधना का महत्व और बढ़ जाता है. पंडित पुरनेंदु पाठक के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा भक्त के लिए आध्यात्मिक शांति और सकारात्मकता का माध्यम बन सकती है.

माता पार्वती: वैवाहिक सुख की देवी

सावन के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखने की परंपरा है. इस दिन माता पार्वती की पूजा की जाती है. मान्यता है कि देवी की आराधना से अखंड सौभाग्य, दांपत्य जीवन में प्रेम और सुख की कामना पूरी होने का आशीर्वाद मिलता है. अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से पूजा करती हैं.

गणेश जी: पूजा की शुरुआत प्रथम पूज्य से

भगवान शिव की पूजा से पहले श्री गणेश का स्मरण करना शुभ माना जाता है. गणपति प्रथम पूज्य हैं और धार्मिक मान्यता के अनुसार उनकी आराधना से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं. गणेश जी को रिद्धि-सिद्धि और शुभता का प्रतीक भी माना जाता है.

श्रीहरि विष्णु: हरि-हर आराधना का महत्व

सावन का समय चातुर्मास से भी जुड़ा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं. सावन एकादशी पर शिव-विष्णु यानी हरि-हर की पूजा करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे आध्यात्मिक उन्नति और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

हनुमान जी: शिव के रुद्र स्वरूप की आराधना

धार्मिक परंपरा में हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार माना गया है. सावन के मंगलवार और शनिवार को बजरंगबली की पूजा विशेष मानी जाती है. भक्त भय, नकारात्मकता और बाधाओं से मुक्ति की कामना से हनुमान जी का स्मरण करते हैं.

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नाग देवता: सावन में नाग पंचमी का महत्व

भगवान शिव के गले में नाग का विशेष स्थान है. सावन शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी मनाई जाती है. इस दिन नाग देवता की पूजा की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे सर्प संबंधी भय दूर करने और परिवार की सुख-शांति की कामना की जाती है.

नंदी और कार्तिकेय: मनोकामना और विजय की कामना

नंदी भगवान शिव के वाहन और परम भक्त माने जाते हैं. मंदिरों में नंदी के कान में मनोकामना कहने की परंपरा प्रचलित है. वहीं, भगवान कार्तिकेय को शक्ति, साहस और विजय का प्रतीक माना जाता है. उनकी पूजा से जीवन में आत्मविश्वास और सफलता की कामना की जाती है.

शिव परिवार की आराधना से पूर्ण होती है पूजा

सावन में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, गणेश, विष्णु, हनुमान, नाग देवता, नंदी और कार्तिकेय की आराधना धार्मिक दृष्टि से विशेष मानी जाती है. श्रद्धा के साथ की गई पूजा से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की कामना की जाती है.


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लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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