Sawan 2026: 30 जुलाई, गुरुवार से सावन माह की शुरुआत हो चुकी है. भगवान शिव की भक्ति और आराधना के इस पावन महीने में श्रद्धालु शिवालयों में जाकर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सावन में शिवलिंग पर श्रद्धा से एक लोटा जल अर्पित करने मात्र से भी भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं. हालांकि, जलाभिषेक करते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है. मान्यता है कि अनजाने में की गई छोटी-सी गलती भी पूजा के शुभ फल को प्रभावित कर सकती है. आइए जानते हैं कि सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
तांबे के लोटे में दूध भरकर न चढ़ाएं
जलाभिषेक के लिए तांबे का पात्र शुभ माना जाता है, लेकिन तांबे के बर्तन में दूध भरकर शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार तांबे के संपर्क में आने से दूध अर्पित करने योग्य नहीं रहता. इसलिए दूध चढ़ाने के लिए पीतल, चांदी या स्टील के पात्र का इस्तेमाल करें.
सही दिशा का रखें ध्यान
शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करना शुभ माना जाता है. उत्तर दिशा को भगवान शिव का धाम कैलाश की दिशा माना जाता है. पूजा के दौरान पूर्व या आग्नेय (पूर्व-दक्षिण) दिशा की ओर मुख करने से बचें.
खड़े होकर या तेज धार से जल न चढ़ाएं
शिवलिंग पर जल हमेशा शांत मन और श्रद्धा के साथ चढ़ाएं. खड़े होकर या बहुत तेज धार से जल अर्पित करने के बजाय बैठकर या थोड़ा झुककर धीरे-धीरे जल चढ़ाएं. जलाभिषेक करते समय 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है.
जल चढ़ाने का सही क्रम
अगर आप जल के साथ दूध या पंचामृत भी अर्पित कर रहे हैं, तो सबसे पहले शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं. इसके बाद दूध या पंचामृत अर्पित करें और अंत में फिर से शुद्ध जल चढ़ाकर अभिषेक पूर्ण करें. धार्मिक मान्यता के अनुसार यही जलाभिषेक का सही क्रम माना जाता है.
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