Sankashti Chaturthi 2026: आज 5 फरवरी 2026 दिन गुरुवार को फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा. फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी के दिन सूर्योदय से चंद्रोदय तक कठिन व्रत का पालन किया जाता है और भगवान श्रीगणेश की पूजा अर्चना की जाती है. संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्रमा की पूजा का विशेष विधान है. संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण चंद्रमा की पूजा करने के बाद ही किया जाता है. आइए जानते हैं कि इस दिन आपके शहर में चांद निकलने का सही समय क्या रहेगा.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी शुभ मुर्हूत
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 5 फरवरी 2026 दिन गुरुवार को है.
फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – 04 फरवरी 2026 की रात 01 बजकर 28 मिनट पर
फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि समाप्त – 05 फरवरी 2026 की रात 01 बजकर 40 मिनट पर
फाल्गुन कृष्ण पक्ष संकष्टी चतुर्थी के दिन चन्द्रोदय का समय- रात 09 बजकर 10 मिनट पर
शुभ उत्तम मुहर्त : सुबह 6 बजकर 31 मिनट से सुबह 7 बजकर 54 मिनट तक
अभिजीत मुहर्त : दोपहर 11 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक
संकष्टी चतुर्थी व्रत पारण का शुभ समय : चन्द्रोदय के समय रात 09 बजकर 10 मिनट से रात 11.00 बजे तक
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की संक्षिप्त पूजा विधि
– सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान गणेश के समक्ष व्रत का संकल्प लें.
– चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
– गणेश जी को गंगाजल से अभिषेक करें, फिर दूर्वा, अक्षत, सिंदूर, फूल और धूप-दीप अर्पित करें.
– बप्पा को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं.
– भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें.
– द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें.
– रात को चंद्रमा निकलने पर अर्घ्य दें और पूजा के बाद अपना व्रत खोलें.
संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना अत्यंत शुभ और फलदायी मानी जाती है. ‘संकष्टी’ का अर्थ है संकटों का नाश करने वाली तिथि, इसलिए इस दिन विघ्नहर्ता गणेश की उपासना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं. गणेश जी बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के दाता माने जाते हैं और उनकी आराधना शीघ्र फल देने वाली होती है. धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत करता है, उसके जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.
भगवान गणेश के इन मंत्रों का करें जाप
- ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये।
वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥ - ॐ गं गणपतये नमः॥
