Raksha Bandhan 2026 Aarti and Mantra: रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी कलाई पर राखी बांधती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार राखी बांधते समय मंत्र का जाप करने से रक्षासूत्र का महत्व और बढ़ जाता है. आइए जानते हैं राखी बांधने का सही तरीका, मंत्र और उसका सरल अर्थ.
राखी बांधते समय कौन-सा मंत्र बोलें?
भाई की कलाई पर राखी या रक्षासूत्र बांधते समय इस मंत्र का जाप किया जाता है:
"येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥"
राखी बांधते समय श्रद्धा के साथ इस मंत्र का उच्चारण किया जा सकता है. यह रक्षासूत्र की स्थिरता और रक्षा की कामना से जुड़ा पारंपरिक मंत्र है.
क्या है राखी मंत्र का अर्थ?
इस मंत्र में राजा बलि का उल्लेख मिलता है. इसका भावार्थ है कि जिस रक्षासूत्र से शक्तिशाली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं. हे रक्षासूत्र, तुम हमेशा स्थिर रहो और अपने संकल्प से विचलित मत हो.
धार्मिक मान्यता में यह मंत्र भाई की रक्षा, सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना से जुड़ा माना जाता है.
रक्षाबंधन के दिन को और भी ज्यादा शुभ बनाने के लिए आइए श्री हरि की आरती करके उनकी कृपा प्राप्त करते हैं.
विष्णु की आरती (Om Jai Jagdish Hare Aarti)
ओम जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ओम जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ओम जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ओम जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ओम जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ओम जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे।
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ओम जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ओम जय जगदीश हरे।
श्री जगदीश जी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपति पावे॥ ओम जय जगदीश हरे।
राखी बांधने की सही विधि क्या है?
रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले भाई को स्वच्छ स्थान पर बैठाएं. पारंपरिक मान्यता के अनुसार भाई का मुख पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है.
इसके बाद बहन भाई के माथे पर रोली या कुमकुम से तिलक लगाए और अक्षत यानी चावल लगाए. फिर भाई की कलाई पर राखी बांधते समय ऊपर दिए गए मंत्र का जाप करें
राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारकर मिठाई खिलाई जा सकती है. भाई भी बहन को अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार देकर उसके सुख और सुरक्षा की कामना करता है.
राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान
राखी बांधते समय साफ-सफाई और पूजा की सामग्री का ध्यान रखें. परंपरा के अनुसार तिलक और राखी बांधते समय भाई-बहन का मन शांत और सकारात्मक होना चाहिए. अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में रक्षाबंधन की विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है.
नोट: मंत्र और पूजा-विधि धार्मिक परंपराओं एवं मान्यताओं पर आधारित हैं.
