Raksha Bandhan 2026 Shubh Yog: इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा. ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन कई शुभ योग और नक्षत्र का संयोग बन रहा है. खास बात यह है कि राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का साया नहीं रहेगा, जिससे पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है. आइए जानें ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा से राखी पर बन रहे शुभ योग के बारे में
रक्षाबंधन पर बन रहे हैं 7 शुभ योग
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन शतभिषा नक्षत्र, सुकर्मा योग, त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग समेत कई शुभ संयोग बन रहे हैं. इसके अलावा बुधादित्य राजयोग, हंस योग और समसप्तक योग का भी उल्लेख किया जा रहा है.
इन शुभ योगों के कारण रक्षाबंधन का दिन पूजा-पाठ, दान, धार्मिक कार्य और शुभ कार्यों के लिए विशेष माना जा रहा है.
शतभिषा नक्षत्र में रहेगा चंद्रमा
रक्षाबंधन के दिन चंद्रमा कुंभ राशि के शतभिषा नक्षत्र में रहने की बात कही जा रही है. ज्योतिष में शतभिषा नक्षत्र का संबंध वरुण देव से माना जाता है, जबकि इसके स्वामी राहु हैं. इस नक्षत्र में आध्यात्मिक कार्य, पूजा और दान-पुण्य को महत्वपूर्ण माना जाता है.
28 अगस्त को कब बांधें राखी?
पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहने की जानकारी दी गई है. दिल्ली के पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है.
अगर सुबह राखी नहीं बांध पाएं तो दोपहर में भी शुभ समय देखा जा सकता है. हालांकि राहुकाल के दौरान राखी बांधने से बचने की धार्मिक परंपरा है. अलग-अलग शहरों में मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर संभव है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहेगा.
रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण का भी संयोग
28 अगस्त को आंशिक चंद्रग्रहण का संयोग भी बताया जा रहा है. हालांकि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने की स्थिति में इसके सूतक और धार्मिक प्रभाव को लेकर स्थानीय पंचांग एवं परंपरा को प्राथमिकता देना उचित रहेगा.
इस तरह शुभ योगों, शतभिषा नक्षत्र और भद्रा से राहत के कारण रक्षाबंधन 2026 ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है.
नोट: शुभ योग, मुहूर्त और ग्रहों के प्रभाव से जुड़ी बातें ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं.
