101, 501 या 1100? जानिए रक्षाबंधन पर बहन को कितनी दक्षिणा देना है सही

रक्षाबंधन पर बहन को पैसे देने की कोई निश्चित राशि तय नहीं है. जानिए 101, 501, 1100 रुपये जैसी दक्षिणा की परंपरा, पूजा की थाली में जरूरी सामग्री और दान-पुण्य से जुड़े धार्मिक नियम.

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने और मिठाई खिलाने का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के स्नेह, सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और भाई उसकी सुरक्षा व सुख-समृद्धि की कामना करता है. इसके बाद भाई की ओर से बहन को उपहार या दक्षिणा देने की परंपरा है. 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा.

कितने रुपये देना शुभ माना जाता है?

बहन को कितने पैसे देने चाहिए, इसका कोई निश्चित धार्मिक नियम नहीं है. दक्षिणा की राशि से अधिक महत्व भाई की भावना और सामर्थ्य का माना जाता है. भाई अपनी क्षमता के अनुसार 101, 501, 1100 या 2100 रुपये जैसी राशि दे सकता है. कई परिवारों में 11, 21, 51 या 101 रुपये से दक्षिणा देने की शुरुआत करने की परंपरा भी है.

अगर बजट सीमित हो तो छोटी राशि देना भी पूरी तरह उचित है. वहीं, सामर्थ्य अधिक होने पर नकद राशि के साथ कपड़े, आभूषण, किताबें या बहन की पसंद का कोई उपयोगी उपहार दिया जा सकता है.

पूजा की थाली में क्या रखें?

रक्षाबंधन पर पूजा के लिए रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखी जाती है. बहन पहले भाई को तिलक लगाकर अक्षत अर्पित करती है, फिर आरती उतारकर दाहिनी कलाई पर राखी बांधती है. इसके बाद मिठाई खिलाने की परंपरा है. धार्मिक विधि में भाई की मंगलकामना के साथ रक्षा-सूत्र बांधने को विशेष महत्व दिया जाता है.


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दान-पुण्य में दिखावे से ज्यादा भावना जरूरी

ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहायता देना शुभ कार्य माना जाता है. दान करते समय दिखावे से बचकर श्रद्धा और सेवा की भावना रखना बेहतर माना जाता है. भाई-बहन मिलकर किसी जरूरतमंद परिवार की मदद भी कर सकते हैं.

दक्षिणा के साथ दें सम्मान का उपहार

रक्षाबंधन पर बहन को दी गई रकम को केवल पैसों के रूप में नहीं, बल्कि भाई के स्नेह और सम्मान के प्रतीक के तौर पर देखना चाहिए. इसलिए राशि छोटी हो या बड़ी, उसमें अपनापन होना सबसे महत्वपूर्ण है. यही भावना इस पर्व को केवल परंपरा नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने वाला खास अवसर बनाती है.


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लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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