Putrada Ekadashi 2026: आज 23 अगस्त 2026, शनिवार को पुत्रदा एकादशी का पावन पर्व मनाया जा रहा है. यह पर्व भगवान विष्णु को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है तथा जीवन के तमाम संकट दूर हो जाते हैं. पूजा के अंत में भगवान की आरती की जाती है. मान्यता है कि आरती करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मकता आती है. साथ ही, घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है.
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे. भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय…॥
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का. सुख-सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी. तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥ ॐ जय…॥
तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी. पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता. मैं मूर्ख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति. किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे. भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय…॥
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भगवान विष्णु की आरती करने की विधि
पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के अंत में आरती जरूर करनी चाहिए. आरती करने की सरल विधि इस प्रकार है:
- पूजा की थाली में रोली, अक्षत, फूल, घी का दीपक या कपूर और घंटी रखें.
- आरती शुरू करने से पहले घी का दीपक या कपूर जलाएं. इसके बाद दाएं हाथ से घंटी बजाते हुए आरती करें.
- आरती की थाली को भगवान विष्णु के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं:
- आरती पूरी होने के बाद सबसे पहले स्वयं आरती की लौ को दोनों हाथों से स्पर्श कर माथे और आंखों से लगाएं. इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों को आरती दें.
- आरती करते समय मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु का स्मरण करें.
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