Putrada Ekadashi 2026: सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किया जाता है. मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए रखा जाता है. पूजा के दौरान भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर किस दिशा में स्थापित करें और किस दिशा में मुख करके पूजा करें, इसे लेकर भी विशेष मान्यताएं हैं. आइए, ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से जानते हैं पूजा की सही दिशा और भगवान विष्णु को स्थापित करने का तरीका.
भगवान विष्णु को किस दिशा में करें स्थापित?
धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी भी मांगलिक या धार्मिक कार्य के लिए घर का ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा सबसे पवित्र माना जाता है.
- चौकी की स्थापना: पुत्रदा एकादशी के दिन पूजा की चौकी को घर के उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण या पूर्व दिशा में रखें.
- भगवान का मुख: भगवान विष्णु और बाल गोपाल की प्रतिमा या तस्वीर को चौकी पर पीले वस्त्र बिछाकर इस तरह स्थापित करें कि उनका उत्तर दिशा मुख पूर्व या की ओर हो.
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किस दिशा में बैठकर करें पूजा?
- साधक का मुख: पूजा करते समय व्रत रखने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए.
- पूर्व दिशा की ओर मुख: पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से बुद्धि, ज्ञान और एकाग्रता में वृद्धि होने की मान्यता है.
- उत्तर दिशा की ओर मुख: उत्तर दिशा को धन और समृद्धि की दिशा माना जाता है. इस दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से घर में सुख-शांति और धन-धान्य की वृद्धि होने की मान्यता है.
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