डॉ राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’
Padmini Ekadashi 2026: पुरुषोत्तम मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. इसे पुरुषोत्तमी और कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और अंतकाल में उसे श्रीविष्णु लोक की प्राप्ति होती है. स्कन्द पुराण, पद्म पुराण, भविष्य पुराण और विष्णु पुराण में इस एकादशी का विशेष महात्म्य बताया गया है. कहा गया है कि इस व्रत से बढ़कर न कोई यज्ञ है और न कोई पुण्य अनुष्ठान.
पद्मिनी एकादशी 2026 शुभ तिथि और पारण समय
अधिक ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली पवित्र पद्मिनी एकादशी इस वर्ष 27 मई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी. हिंदू पंचांग में उदयातिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए श्रद्धालु इसी दिन व्रत रखेंगे.
- एकादशी तिथि आरंभ: 26 मई 2026, मंगलवार को सुबह 5:10 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 27 मई 2026, बुधवार को सुबह 6:21 बजे
- व्रत रखने की तिथि: 27 मई 2026
- पारण का शुभ समय: 28 मई 2026 को सुबह 5:25 बजे से 7:56 बजे तक
धार्मिक मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में आने वाली पद्मिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाने वाला माना जाता है।
राजा कीर्तिवीर्य और रानी पद्मिनी की कथा
त्रेता युग में महिष्मति नगरी के राजा कीर्तिवीर्य अपनी हजार पत्नियों के साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे थे, लेकिन संतान सुख से वंचित थे. अनेक उपायों और पूजा-पाठ के बाद भी जब कोई समाधान नहीं मिला, तब राजा ने तपस्या करने का निश्चय किया. उनकी प्रिय पत्नी रानी पद्मिनी भी साथ में गंधमादन पर्वत पर कठोर तप में लीन हो गईं.
रानी पद्मिनी की अखंड भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर माता अनुसुइया प्रकट हुईं. उन्होंने बताया कि अधिमास में आने वाली इस विशेष एकादशी का व्रत सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है. माता के निर्देशानुसार राजा और रानी ने पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से पद्मिनी एकादशी का व्रत किया.
ये भी पढ़ें: पद्मिनी एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि के साथ बनेगा रवि योग,जानें शुभ मुहूर्त
पद्मिनी एकादशी का आध्यात्मिक संदेश
व्रत के प्रभाव से रानी पद्मिनी ने नौ महीने बाद पुत्ररत्न को जन्म दिया. तभी से इस एकादशी का नाम पद्मिनी एकादशी पड़ा. यह व्रत अटूट आस्था, आंतरिक शुद्धता और निस्वार्थ भक्ति का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक दृष्टि से यह एकादशी सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर भगवान विष्णु के प्रति समर्पण का संदेश देती है.
