Ganesh Vehicle Story: पुराणों में भगवान गणेश और उनके वाहन मूषक से जुड़ी कई रोचक कथाएं मिलती हैं. इन्हीं में से एक कथा असुर गजमुख की है, जो अपनी शक्ति और अहंकार के कारण देवताओं के लिए बड़ा संकट बन गया था. बाद में वही असुर भगवान गणेश का वाहन बना और उनका प्रिय साथी भी कहलाया.
शिवजी को प्रसन्न करने के लिए की कठोर तपस्या
बहुत समय पहले गजमुख नाम का एक शक्तिशाली असुर राजा था. वह और अधिक ताकत तथा धन प्राप्त करना चाहता था. साथ ही उसकी इच्छा थी कि सभी देवी-देवता उसके अधीन हो जाएं. इसी उद्देश्य से उसने अपना राज्य छोड़ दिया और जंगल में जाकर भगवान शिव की कठोर तपस्या शुरू कर दी. कई वर्षों तक बिना भोजन और पानी के तप करने के बाद भगवान शिव उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उसे दिव्य शक्तियां प्रदान कीं. शिवजी ने उसे ऐसा वरदान भी दिया कि किसी भी शस्त्र से उसकी मृत्यु नहीं हो सकेगी.
वरदान के बाद बढ़ा अहंकार
अत्यधिक शक्तियां मिलने के बाद गजमुख का अहंकार बढ़ गया. उसने अपने बल का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया और देवताओं पर आक्रमण करने लगा. उसके आतंक से सभी देवता परेशान हो गए. अंत में देवताओं ने भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा से रक्षा की प्रार्थना की. तब भगवान शिव ने गजमुख को रोकने के लिए भगवान गणेश को भेजा.
गणेश जी ने सिखाया विनम्रता का पाठ
भगवान गणेश और गजमुख के बीच भयंकर युद्ध हुआ. गणेश जी ने असुर को बुरी तरह घायल कर दिया, लेकिन वह फिर भी नहीं माना. तब गजमुख ने स्वयं को एक विशाल मूषक का रूप दे दिया और गणेश जी पर हमला करने दौड़ा. जैसे ही वह पास आया, गणेश जी उसके ऊपर बैठ गए और उसे जीवनभर के लिए अपना वाहन बना लिया. धीरे-धीरे गजमुख का अहंकार समाप्त हो गया और वह भगवान गणेश का प्रिय भक्त और मित्र बन गया.
