Astrology Marriage Prediction: विवाह में देरी और बार-बार आने वाली बाधाएं अक्सर मानसिक तनाव का कारण बन जाती हैं. कुंडली का सातवां भाव हमारे जीवनसाथी और विवाह का दर्पण होता है. अगर आप भी इस सवाल से जूझ रहे हैं कि “मेरी शादी कब होगी?” या “बात बनते-बनते क्यों बिगड़ जाती है?”, तो इसका जवाब आपकी कुंडली के ग्रहों की स्थिति और उनकी महादशा में छिपा है. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य दीप्ति शर्मा से कि विवाह के योग कब बनते हैं और देरी होने पर कौन से ज्योतिषीय उपाय कारगर साबित होते हैं.
कुंडली में विवाह का मुख्य आधार
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यदि कुंडली का सातवां भाव बलवान और शुभ ग्रहों से युक्त है, तो विवाह बिना किसी अड़चन के समय पर होता है. यदि इस भाव पर शनि, राहु-केतु या मंगल जैसे क्रूर ग्रहों का प्रभाव हो, या सातवें भाव का स्वामी (सप्तमेश) छठे या आठवें भाव के स्वामियों से पीड़ित हो, तो विवाह में लगातार बाधाएं आती हैं. ऐसी स्थिति में सही ज्योतिषीय उपाय ही ग्रहों की बाधाओं को खत्म कर समय पर आपकी शादी कराएंगे और आपको एक मनचाहा जीवनसाथी दिलाएंगे.
ग्रहों की मजबूती ही तय करती है कि शहनाइयां कब बजेंगी
ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: ने बताया कि विवाह का सही समय ग्रहों की महादशा और अंतर्दशा पर निर्भर करता है. यदि सातवें भाव में बैठे ग्रह, सातवें भाव के स्वामी, या उससे संबंध बनाने वाले शुभ ग्रहों की दशा चल रही है, तो विवाह के योग तत्काल बन जाते हैं. यदि यह दशाएं जीवन के शुरुआती वर्षों में आती हैं, तो जल्दी शादी होती है. लेकिन यह दशाएं देर से आती हैं, तो विवाह में विलंब स्वाभाविक है.
विभिन्न लग्नों में विवाह के योग
ज्योतिषाचार्य दीप्ति शर्मा ने बताया कि ज्योतिषीय विश्लेषण के आधार पर विवाह के योग को लग्न के अनुसार भी समझा जा सकता है. जैसे मेष लग्न में सप्तमेश शुक्र यदि बलवान हो और अशुभ ग्रहों (जैसे बुध) से मुक्त हो, तो शुक्र की दशा आते ही शादी हो जाती है. यदि वृष लग्न में सप्तमेश मंगल शुभ ग्रहों (गुरु, शुक्र या बुध) के संपर्क में हो और शनि-राहु से पीड़ित न हो, तो मंगल की दशा में शीघ्र विवाह होता है. वहीं तुला लग्न में यदि सप्तमेश मंगल शनि, राहु या सूर्य जैसे ग्रहों के प्रभाव में हो, तो देरी और अड़चनें आती हैं, जहां गुरु या शुक्र जैसे शुभ ग्रहों का साथ मिलना अनिवार्य हो जाता है.
विवाह बाधा दूर करने के अचूक ज्योतिषीय उपाय
अगर आपकी कुंडली में विवाह के योग कमजोर हैं या ग्रहों के कारण देरी हो रही है, तो कुछ विशेष उपाय अत्यंत फलदायी होते हैं. सप्तम भाव के दोषों को दूर करने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा (गौरी-शंकर पूजन) करना श्रेष्ठ है. गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करना, केले के वृक्ष का पूजन और ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम:’ मंत्र का जाप करने से बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं, जो कन्याओं के विवाह के मुख्य कारक हैं. इसके साथ ही शिवलिंग पर चना का दाल अर्पण करने पर भी शिघ्र विवाह का योग बनता है. वहीं पुरुषों को शुक्र को मजबूत करने के उपाय करने चाहिए.
Also Read: राहु-केतु क्यों कहलाते हैं छाया ग्रह, कैसे दिलाते हैं लोगों को अचानक सफलता और मोक्ष?
