Margashirsha Amavasya 2025: धार्मिक मान्यता है कि इस अमावस्या की रात देवी-देवताओं का आशीर्वाद जल्दी प्राप्त होता है. इसलिए लोग सुबह स्नान कर नदी में तर्पण करते हैं और शाम को दीपदान व भगवान शिव की पूजा करते हैं. माना जाता है कि इससे पितृ दोष शांत होता है, घर में सुख-शांति आती है और मन की बेचैनी कम होती है.
मार्गशीर्ष अमावस्या की रात किए जाने वाले प्रमुख उपाय
पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं: कहा जाता है कि अमावस्या की रात पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भगवान विष्णु व पितरों की कृपा मिलती है.
शिवलिंग पर जल और काले तिल चढ़ाएं: श्रद्धा से शिवलिंग पर जल और काले तिल चढ़ाने से मन की परेशानियां कम होती हैं और ग्रहों संबंधी बाधाएँ शांत होती हैं.
काले कपड़े में सात अनाज बांधकर दान करें: इस उपाय को करने से राहु-केतु के दोष कम होते हैं और घर में आर्थिक स्थिरता आती है.
काली तिल से दीपक जलाएं: काली तिल का दीपक जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और वातावरण शुद्ध होता है.
पितरों के लिए तर्पण या ब्राह्मण भोजन: मार्गशीर्ष अमावस्या पितरों को प्रसन्न करने का विशेष दिन है. तर्पण, पिंडदान या ब्राह्मण भोजन कराने से उनके आशीर्वाद से जीवन में शांति बढ़ती है.
शाम को लक्ष्मी पूजा करें: अमावस्या की रात देवी लक्ष्मी की पूजा से धन संबंधी परेशानियां कम होती हैं और घर में समृद्धि आती है.
मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 कब है?
पंचांग के अनुसार
- अमावस्या तिथि 19 नवंबर 2025 को सुबह 09:43 बजे शुरू होगी.
- इसका समापन 20 नवंबर 2025 को दोपहर 12:16 बजे होगा.
पंचांग के नियम के मुताबिक, अमावस्या का मुख्य फल उसी दिन माना जाता है, जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहती है. इसलिए मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 की पूजा 20 नवंबर (गुरुवार) को की जाएगी.
मार्गशीर्ष अमावस्या व्रत का महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि देवताओं से पहले पितरों को खुश करना चाहिए. जैसे श्राद्ध पक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाती है, उसी तरह अगहन अमावस्या पर व्रत रखने से भी पितर प्रसन्न होते हैं. अगर किसी की कुंडली में पितृ दोष हो, संतान सुख न मिल रहा हो, या भाग्य स्थान में राहू नीच का हो, तो इस अमावस्या का व्रत बहुत लाभ देता है. माना जाता है कि इस व्रत से पितर ही नहीं, बल्कि देवता, ऋषि और सभी जीव-जंतुओं की तृप्ति होती है.
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