Mangla Gauri Vrat 2026: सावन महीने के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. इस दिन मां पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना से यह व्रत रखती हैं. वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से मंगला गौरी व्रत करती हैं.
पूजा में 16 की संख्या क्यों है खास?
मंगला गौरी की पूजा में 16 की संख्या को शुभ और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है. इसी वजह से देवी को कई पूजन सामग्री 16 की संख्या में अर्पित करने की परंपरा है.
16 श्रृंगार का महत्व
मां गौरी को सुहाग और सौभाग्य का स्वरूप माना जाता है. इसलिए पूजा में 16 श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा है. इसमें सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी, काजल, महावर, बिछिया आदि सुहाग की सामग्री शामिल की जाती है. मान्यता है कि इससे माता का आशीर्वाद और अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है.
16 का संबंध षोडशोपचार पूजा से
शास्त्रों में देवी पूजा में षोडशोपचार, यानी 16 प्रकार के पूजा उपचार का विशेष महत्व बताया गया है. इसी कारण मंगला गौरी की पूजा में भी 16 संख्या को शुभ माना जाता है. परंपरा के अनुसार फूल, फल, माला, पान, सुपारी, लौंग, इलायची और अन्य सामग्री 16 की संख्या में अर्पित की जाती है.
मंगला गौरी व्रत पूजा विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और मंगला गौरी व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें.
- पूजा स्थान पर लकड़ी की चौकी रखें. उस पर लाल या लाल-सफेद कपड़ा बिछाकर मां मंगला गौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
- सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें. इसके बाद कलश स्थापना सहित अन्य आवश्यक पूजन करें.
- माता के सामने घी का दीपक जलाएं. परंपरा के अनुसार आटे से बने दीपक में 16 बत्तियां लगाने का विधान है.
- मां गौरी को चंदन, अक्षत, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें. इसके बाद 16 श्रृंगार की सामग्री, 16 लड्डू, 16 फल, 16 पान, 16 सुपारी, 16 लौंग, 16 इलायची और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें.
- पूजा के दौरान मां गौरी के मंत्र का जाप करें: सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके. शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
- अंत में मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें. इसके बाद माता की आरती करें और पूजा पूर्ण करें.
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