Mangala Gauri Vrat 2025: इन हरकतों से खंडित हो सकता है मंगला गौरी व्रत, बरतें विशेष सावधानी

Mangala Gauri Vrat 2025 : मंगला गौरी व्रत देवी पार्वती की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ साधन है, परंतु यह तभी फलदायी होता है जब श्रद्धा, नियम और सावधानीपूर्वक किया जाए. उपर्युक्त गलतियां व्रत को खंडित कर सकती हैं.

Mangala Gauri Vrat 2025 : मंगला गौरी व्रत श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को सुहागन स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला अत्यंत फलदायी व्रत है यह व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है और पति की दीर्घायु, वैवाहिक सुख और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हेतु किया जाता है. शास्त्रों के अनुसार इस व्रत की सिद्धि तभी संभव है जब इसे पूर्ण श्रद्धा, नियम और मर्यादा के साथ किया जाए. कुछ कार्य ऐसे हैं जो भूलवश कर दिए जाएं तो व्रत की पवित्रता भंग हो सकती है और पुण्य फल खंडित हो जाता है. अतः सावधानी अत्यंत आवश्यक है. नीचे मुख्य कार्य बताए जा रहे हैं जिन्हें मंगला गौरी व्रत के दौरान नहीं करना चाहिए:-

– व्रत के दिन क्रोध, कलह या अपशब्दों का प्रयोग न करें

धार्मिक शास्त्रों में कहा गया है कि व्रत के दिन मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहना अत्यंत आवश्यक है. क्रोध करना, किसी से झगड़ा करना या कटु शब्द बोलना व्रत की पवित्रता को खंडित करता है. इससे देवी गौरी अप्रसन्न हो सकती हैं.

– अशुद्ध वस्त्र या अनाचार्य भोजन का सेवन वर्जित है

व्रत के दिन साफ-सुथरे वस्त्र पहनने चाहिए और सात्त्विक भोजन ही करना चाहिए. प्याज, लहसुन, मांसाहार, शराब आदि का सेवन व्रत को अपवित्र करता है. साथ ही, सूर्योदय से पहले स्नान करके शुद्ध होकर ही व्रत का संकल्प लेना चाहिए.

– व्रत कथा एवं पूजन में लापरवाही न करें

मंगला गौरी व्रत में व्रत कथा का पाठ या श्रवण अनिवार्य है. यदि कथा बिना सुने या पढ़े व्रत किया जाए तो उसका फल अधूरा रह जाता है। पूजन सामग्री में कमी, पूजा स्थान की अशुद्धता या विधिवत पूजा न करना व्रत में दोष उत्पन्न कर सकता है.

– व्रत के समय श्रृंगार रहित रहना अशुभ माना जाता है

यह व्रत सौभाग्यवती स्त्रियों द्वारा किया जाता है, इसलिए इस दिन पूर्ण सौभाग्य श्रृंगार (जैसे बिंदी, चूड़ी, सिन्दूर आदि) अवश्य करना चाहिए. बिना श्रृंगार के पूजा करना मंगला गौरी व्रत में अनुचित माना गया है.

– व्रत के दिन रात्रि जागरण एवं स्तोत्र पाठ का त्याग न करें

मंगला गौरी व्रत में रात को जागरण कर देवी के भजन, कीर्तन व स्तोत्रों का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है. इस नियम की अवहेलना करने से व्रत अधूरा माना जाता है और देवी कृपा में कमी आ सकती है.

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मंगला गौरी व्रत देवी पार्वती की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ साधन है, परंतु यह तभी फलदायी होता है जब श्रद्धा, नियम और सावधानीपूर्वक किया जाए. उपर्युक्त गलतियां व्रत को खंडित कर सकती हैं, अतः सावधान रहें और विधिपूर्वक व्रत का पालन करें.

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Author: Ashi Goyal

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