Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के दिन भोलेनाथ की पूजा के कुछ विशेष नियम हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी है. शिव पुराण के अनुसार, महादेव एक वैरागी और तपस्वी देव हैं, इसलिए उनकी पूजा में कुछ ऐसी चीजें वर्जित मानी गई हैं जो अन्य देवी-देवताओं को प्रिय हैं. तुलसी, हल्दी और कुमकुम जैसी आम पूजा सामग्री अगर अनजाने में भी शिव जी को अर्पित कर दी जाए, तो इससे पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है.
शिव पूजा में ये चीजें हैं पूरी तरह वर्जित
तुलसी पत्ता शिवलिंग पर क्यों नहीं चढ़ाना चाहिए?
भगवान शिव ने तुलसी के पति असुर जालंधर का वध किया था. जालंधर की मृत्यु के बाद तुलसी ने शिव जी की पूजा में शामिल न होने की बात कही थी. इसके अलावा, तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय हैं, इसलिए महादेव की पूजा में इनका उपयोग नहीं किया जाता है.
केतकी का फूल शिवलिंग पर क्यों नहीं चढ़ाना चाहिए?
ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच हुए एक विवाद के दौरान केतकी के फूल ने ब्रह्मा जी के असत्य (झूठ) में साथ दिया था. इस बात से रुष्ट होकर महादेव ने केतकी को श्राप दिया था कि वह कभी भी उनकी पूजा में स्वीकार नहीं करेंगे.
शिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाना चाहिए?
हल्दी को सौभाग्य और स्त्री सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है. भगवान शिव एक ‘वैरागी’ और ‘पुरुष तत्व’ के प्रतीक हैं, जो भस्म धारण करते हैं. इसलिए शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाना शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है.
शिवलिंग पर कुमकुम-सिंदूर चढ़ाना क्यों है वर्जित?
सिंदूर को सुहाग और श्रृंगार का प्रतीक माना जाता है. महादेव त्याग और वैराग्य के देवता हैं, जो सांसारिक मोह-माया से दूर रहते हैं, इसलिए उन्हें सिंदूर या कुमकुम अर्पित करना वर्जित है. उनकी पूजा में चंदन का लेप सर्वोत्तम माना गया है.
नारियल का पानी शिवलिंग पर क्यों नहीं चढ़ाना चाहिए?
शिवलिंग पर नारियल अर्पित करना शुभ है, लेकिन नारियल के पानी से अभिषेक वर्जित है. शिवलिंग पर चढ़ाई गई वस्तुएं ‘निर्मालय’ हो जाती हैं.
शिवलिंग पर शंख से जल अर्पित करना क्यों है वर्जित
भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था, जिसकी हड्डियों से शंख की उत्पत्ति मानी जाती है, इसी कारण महादेव की पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना वर्जित माना गया है.
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