Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा वर्ष 2026 में 1 फरवरी को मनाई जाएगी. इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस पवित्र तिथि पर देवतागण स्वर्ग से धरती पर आते हैं और प्रयागराज के पावन संगम में स्नान करते हैं. यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है. विधि-विधान से उनकी पूजा करने से जीवन में धन, सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है. इसके साथ ही, इस दिन पितरों का तर्पण करना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है. आइए ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: से जानतें है, स्नान दान का शुभ समय और सरल उपाय.
माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
माघ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत- 1 फरवरी सुबह 5 बजकर 24 मिनट पर
पूजा का शुभ मुहर्त- 1 फरवरी प्रात: 5 बजकर 24 मिनट से प्रात: 6 बजकर 32 मिनट तक होगा.
पूर्णिमा तिथि समापन- 2 फरवरी को सुबह 3 बजकर 46 मिनट पर
व्रत का पारण- 2 फरवरी की सुबह 6 बजकर 33 मिनट से सुबह 7 बजकर 55 मिनट तक कर सकते है.
माघ पूर्णिमा का महत्व
पापों से मुक्ति- सनातन धर्म में माघ पूर्णिमा महीने को पवित्र तिथि मानी जाती है. धार्मिक मान्यता यह है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से पूर्व में किए गए पाप का नाश होता है और पुण्यफल की प्राप्ति होती है. अगर आप नदी नहीं जा पाएं तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. इसे उतना ही फलदायी माना जाता है.
कल्पवास की पूर्णता- कल्पवास सनातन धर्म की एक प्राचीन परंपरा है, जिसमें मन और आत्मा की शुद्धि के लिए एक महीने तक प्रयाग के संगम तट पर निवास किया जाता है. माघ पूर्णिमा के दिन पर प्रयागराज में एक महीने से चल रहे ‘कल्पवास’ का समापन हो जाता है.
पितृ तर्पण- इस दिन अपने पूर्वजों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करना शुभ माना जाता है.
इस दिन क्या करें
किसी पवित्र नदी या घर पर गंगाजल से स्नान करें.
किसी जरूरतमंद को क्षमता अनुसार तिल, गुड़, कंबल और घी का दान करें.
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें.
भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें.
शाम को चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दें.
माघ पूर्णिमा के दिन करें ये सरल उपाय
धन प्राप्ति के लिए इस दिन मां लक्ष्मी की मूर्ति पर कच्चा दूध, गुलाब जल और गंगाजल चढ़ाएं. शाम में सफेद मिठाई या साबूदाने की खीर का भोग लगाएं.
कुंडली में चंद्र को मजबूत करने के लिए रात में चांदी के पात्र में दूध और जल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें. मानसिक शांति के लिए चन्द्रमा के रोशनी में बैठें.
पितृ दोषों से भी मुक्ति के लिए इस दिन पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं और घी का दीपक जलाएं.
घर की नकारात्मकता दूर करने के लिए अपने मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं और प्रवेश द्वार पर हल्दी से ‘स्वास्तिक’ बनाएं.
किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को सफेद वस्त्र, कंबल और अन्न का दान करें.
ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ | 12 साल का अनुभव
Mo- +91 8620920581
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