Dasha Mata Vrat 2026: हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत और पर्व बताए गए हैं जिन्हें जीवन की परेशानियों को दूर करने और सुख-समृद्धि प्राप्त करने के लिए किया जाता है. इन्हीं में से एक प्रमुख व्रत दशा माता व्रत है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा अपने परिवार की खुशहाली, आर्थिक समृद्धि और ग्रहों की अशुभ दशा को दूर करने के लिए किया जाता है.
राजस्थान सहित देश के कई क्षेत्रों में इस व्रत को बड़ी श्रद्धा और नियमों के साथ मनाया जाता है. मान्यता है कि जो महिलाएं सच्चे मन से दशा माता का व्रत रखती हैं, उनके परिवार से संकट और परेशानियां दूर हो जाती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है.
दशा माता व्रत 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार दशा माता का व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को रखा जाता है. साल 2026 में यह व्रत 13 मार्च, शुक्रवार को मनाया जाएगा.
इस दिन दशमी तिथि का आरंभ सुबह 06:28 बजे से होगा और यह पूरी रात तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर व्रत 13 मार्च को ही रखा जाएगा.
इस दिन पूजा के लिए कुछ विशेष शुभ मुहूर्त भी रहेंगे.
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:07 से 12:55 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:18 बजे तक
इन मुहूर्तों में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है.
दशा माता व्रत में डोरे का विशेष महत्व
दशा माता व्रत में एक विशेष धागा या डोरा बांधा जाता है, जिसका धार्मिक महत्व बताया गया है. मान्यता के अनुसार माता की पूजा करने के बाद इस डोरे को कम से कम एक वर्ष तक पहनकर रखना चाहिए.
इसके बाद वैशाख मास में किसी शुभ दिन इस धागे को उतारा जाता है. माना जाता है कि यह डोरा जीवन में सुख-समृद्धि लाता है, परिवार में खुशहाली बनाए रखता है और घर में धन-संपत्ति की वृद्धि होती है.
व्रत के नियम और पूजा विधि
दशा माता व्रत के दौरान अन्न का सेवन नहीं किया जाता. इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं मीठा ग्रहण करती हैं. यदि चाहें तो एक समय गेहूं से बना भोजन लिया जा सकता है.
इस व्रत की पूजा आमतौर पर पीपल के पेड़ के पास की जाती है. महिलाएं एक साथ बैठकर दशा माता की पूजा करती हैं और व्रत कथा का पाठ सुनती हैं. माना जाता है कि श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया यह व्रत परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाता है.
