Maatangi Jayanti 2026: हिंदू धर्म और तंत्र शास्त्र में दस महाविद्याओं का विशेष महत्व है, जिनमें नौवीं विद्या मां मातंगी हैं. प्रत्येक वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मातंगी जयंती के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि माता की आराधना से ज्ञान और बुद्धि में विकास होता है.
मातंगी जयंती 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग गणना के अनुसार, तृतीया तिथि का विवरण इस प्रकार है:
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे से.
- तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27 बजे तक.
- उदया तिथि के अनुसार: मातंगी जयंती का मुख्य उत्सव 20 अप्रैल को ही मनाया जाएगा.
मां मातंगी का स्वरूप
मां मातंगी का स्वरूप अत्यंत मनमोहक और अलौकिक है. उनका वर्ण गहरे हरे रंग का है, जो प्रकृति और उर्वरता का प्रतीक है. उनके मस्तक पर अर्धचंद्र है. माता के तीन नेत्र हैं, जो उनके दिव्य ज्ञान को दर्शाते हैं. मां की चार भुजाएं हैं. मां के एक हाथ में वीणा है, जो संगीत और कला का प्रतिनिधित्व करती है, दूसरे में खड्ग, तीसरे में पाश और चौथे में अंकुश हैं, जो शत्रुओं और अज्ञानता के विनाश के प्रतीक हैं. इन्हें ‘उच्छिष्ट चांडालिनी’ भी कहा जाता है.
जूठन का भोग
मान्यताओं के अनुसार, मां मातंगी को जूठन का भोग लगाया जाता है, जो यह संदेश देता है कि ईश्वर के लिए शुद्धता से अधिक ‘भाव’ महत्वपूर्ण है. वे सामाजिक बंधनों और भेदभाव से ऊपर उठकर अपने भक्तों पर कृपा करती हैं.
मां मातंगी की पूजा का महत्व
मां मातंगी की साधना से वाणी में ताकत और आत्मविश्वास आता है. जो लोग संगीत, नृत्य या लेखन जैसी कलाओं से जुड़े हैं, उन्हें मां की कृपा से खास सफलता और प्रसिद्धि मिलती है. साथ ही, यह पूजा वैवाहिक जीवन के तनाव को दूर करती है और घर में सुख-शांति और आपसी प्रेम बढ़ाती है.
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