आखिर क्यों लगता है खरमास? पौराणिक कथाओं में छिपा है इसका रहस्य

Kharmas 2026: 15 मार्च से खरमास की शुरुआत हो रही है. इस समय मांगलिक कार्यों को करना वर्जित माना जाता है. आखिर इस अवधि को इतना अशुभ क्यों माना जाता है? और इस अवधि को खर, यानी गधों का मास क्यों कहा जाता है? आइए, पौराणिक कथा के माध्यम से जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब.

Kharmas 2026: हिंदू धर्म में खरमास को अशुभ अवधि माना जाता है. मान्यता है कि खरमास के दौरान सूर्य देव कमजोर हो जाते हैं, जिस कारण उनका तेज कम हो जाता है. खरमास की शुरुआत होते ही शादी-विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. कहा जाता है कि इस समय कोई भी मांगलिक कार्य करने पर शुभ परिणाम नहीं मिलता और कार्यों में बाधाएं आने की भी आशंका रहती है.

पौराणिक कथा: सूर्य देव और सात घोड़ों का रहस्य

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान सूर्य अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं. परिक्रमा के दौरान वे कहीं भी नहीं रुकते हैं. इसी कारण रथ खींचने वाले घोड़े बेहद थक जाते हैं. एक बार निरंतर रथ चलने के कारण सूर्य देव के घोड़ों को अत्यधिक पीड़ा होने लगी. थकान और प्यास से घोड़े व्याकुल हो गए. उन्हें इस अवस्था में देखकर सूर्य देव को बहुत दुख हुआ और उनका हृदय दया से भर गया. इसके बाद वे घोड़ों को एक तालाब के किनारे ले गए.

जैसे ही सूर्य देव ने घोड़ों को पानी पीने के लिए छोड़ा, उन्हें याद आया कि यदि रथ रुक गया तो ब्रह्मांड का नियम टूट जाएगा. तभी उन्हें तालाब के पास दो खर (गधे) दिखाई दिए. सूर्य देव ने घोड़ों को वहीं तालाब के पास विश्राम करने के लिए छोड़ दिया और रथ में गधों को जोत दिया. इसके बाद दोनों खर सूर्य देव के रथ को खींचते हुए परिक्रमा करने लगे. लेकिन गधों की गति कम थी और वे घोड़ों की गति का मुकाबला नहीं कर सकते थे. इस कारण सूर्य की चाल धीमी हो गई और उनका तेज भी कम हो गया.

गधों के रथ खींचने के कारण इस पूरे माह को ‘खरमास’ कहा जाने लगा. जैसे ही सूर्य देव एक महीने बाद अपने घोड़ों के पास लौटते हैं, खरमास समाप्त हो जाता है.

खरमास लगने का ज्योतिषीय कारण

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव बृहस्पति देव की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उस अवधि को खरमास कहा जाता है. मान्यता है कि जब सूर्य अपने गुरु बृहस्पति की राशि में जाते हैं, तो वे उनकी सेवा में लीन हो जाते हैं, जिससे उनका प्रभाव कम हो जाता है. चूंकि सूर्य तेज और प्रताप के कारक हैं, ऐसे में उनका तेज कम होने के कारण इस अवधि में मांगलिक कार्य करना शुभ नहीं माना जाता.

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By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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