Kharmas 2026: जब सूर्य देव बृहस्पति ग्रह की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की शुरुआत होती है. यह अवधि लगभग एक महीने तक चलती है. मान्यता है कि इस समय सूर्य देव का तेज कुछ कम हो जाता है, जिस कारण इस दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य करना शुभ नहीं माना जाता है. साल में दो बार खरमास लगता है. वर्ष 2026 में पहला खरमास 15 मार्च से शुरू होने जा रहा है. आइए जानते हैं कि इस दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं.
खरमास में क्या करें?
खरमास के दौरान व्यक्ति को धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
- प्रतिदिन सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर अर्घ्य दें.
- गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या तिल का दान करना बहुत फलदायी माना जाता है.
- खरमास में भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व होता है. ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना लाभकारी माना जाता है.
- यदि संभव हो, तो किसी पवित्र नदी (गंगा, यमुना आदि) में स्नान करें.
- इस समय भगवान विष्णु और सूर्य देव के मंत्रों का जाप करना चाहिए. माना जाता है कि इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.
खरमास में क्या नहीं करना चाहिए?
खरमास के समय कुछ कार्यों को करना अशुभ माना जाता है.
- इस दौरान शादी, सगाई, तिलक या रोका जैसे विवाह संबंधी संस्कार नहीं करने चाहिए.
- नए घर में प्रवेश, नींव पूजन या भूमि पूजन खरमास के समय करना वर्जित माना जाता है.
- नए व्यवसाय की शुरुआत, नई दुकान या दफ्तर खोलना भी इस समय टालना चाहिए.
- बच्चों का मुंडन संस्कार, कान छेदन या जनेऊ संस्कार इस अवधि में नहीं किए जाते हैं.
- नया वाहन, कीमती आभूषण या नई प्रॉपर्टी खरीदने को भी इस समय टालने की सलाह दी जाती है.
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