Jud Sheetal 2026: मिथिलांचल में बुधवार को जुड़ शीतल (Jud Sheetal) के पावन अवसर पर मैथिली नववर्ष की शुरुआत हर्षोल्लास और परंपरागत उत्साह के साथ हुई. आधुनिकता के इस दौर में जहां कई पारंपरिक मान्यताएं धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही हैं, वहीं मिथिलांचल के लोग आज भी इस पर्व को पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाते हैं. यह पर्व केवल नववर्ष का स्वागत ही नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का अद्भुत संगम भी प्रस्तुत करता है.
परंपरा और प्रकृति का अनोखा संगम
मैथिली नववर्ष की शुरुआत तपती गर्मी के बीच होती है, जो इसे और भी खास बनाती है. जुड़-शीतल के दिन बड़े-बुजुर्ग सुबह-सुबह छोटे सदस्यों के सिर पर जल डालते हैं और उन्हें शीतलता, सुख-समृद्धि और शांत जीवन का आशीर्वाद देते हैं. यह परंपरा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन और ठंडक बनाए रखने का प्रतीक मानी जाती है. हर वर्ष की तरह इस बार भी प्रथम बैशाख को यह पर्व पूरे मिथिलांचल और नेपाल के मिथिला क्षेत्र में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया.
खान-पान और विशेष परंपराएं
इस पर्व की खास बात यह है कि इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता. लोग एक दिन पहले यानी चैत्र माह में बने भोजन को ही ग्रहण करते हैं. साथ ही सत्तू और कच्चे आम (टिकोले) को कुलदेवता को अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है. मंगलवार को सतुआनी और बुधवार को जुड़-शीतल मनाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में “बाइस पाइबैन” भी कहा जाता है.
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सामाजिक संदेश और सांस्कृतिक आयोजन
इस दिन लोग कुआं, तालाब और जल स्रोतों की सफाई करते हैं तथा सड़कों पर जल का छिड़काव कर राहगीरों के लिए शीतलता की कामना करते हैं. यह पर्व पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता का भी संदेश देता है. साथ ही राजा सलहेश की जयंती पर मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं.
