Jharkhand JSSC JPSC Exams Cancelled: झारखंड में जेपीएससी की 22 परीक्षाएं रद्द किए जाने के बाद कई अभ्यर्थियों और सरकारी कर्मचारियों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं. जेपीएससी 11वीं-13वीं परीक्षा में सफल 342 अफसरों की नौकरी पर संकट है. वहीं 64 सीडीपीओ, 56 फूड सेफ्टी अफसर और जेएसएससी सीजीएल से नियुक्त 1975 कर्मियों का भविष्य भी प्रभावित हो सकता है. ऐसे में ज्योतिष की नजर से देखें तो नौकरी, अचानक बदलाव, विवाद और करियर में उतार-चढ़ाव के लिए कुंडली के कुछ ग्रहों को महत्वपूर्ण माना जाता है.
नौकरी और करियर में बदलाव के लिए कौन सा ग्रह जिम्मेदार?
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि ज्योतिषीय मान्यताओं में सूर्य को नौकरी और सरकारी सेवा का प्रमुख कारक माना जाता है. सूर्य कमजोर या पीड़ित हो तो व्यक्ति को अधिकारियों से परेशानी, पद-प्रतिष्ठा में कमी या नौकरी से जुड़े उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है. वहीं राहु को अचानक नौकरी छूटने, अनिश्चितता और अप्रत्याशित परिस्थितियों से जोड़ा जाता है. इसलिए सरकारी नौकरी पर संकट जैसी स्थिति में सूर्य, राहु और शनि की स्थिति को देखा जाता है.
अचानक विवाद और बदनामी का ग्रह कौन?
कुंडली में सूर्य को प्रतिष्ठा और सम्मान से जोड़ा जाता है. इसके पीड़ित होने पर मान-सम्मान को नुकसान पहुंचने या अधिकारियों से विवाद की स्थिति बन सकती है. दूसरी ओर शनि लंबे समय तक चलने वाली परेशानियों और कर्मों के परिणाम से जुड़े माने जाते हैं. राहु अचानक पैदा होने वाले विवाद, भ्रम और अनिश्चित परिस्थितियों का संकेत दे सकता है.
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शादी और मानसिक अशांति में ग्रहों की भूमिका
ज्योतिष के अनुसार मंगल की स्थिति विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन में तनाव से जुड़ी हो सकती है. राहु और शनि को वैवाहिक रिश्तों में दूरी या अलगाव की परिस्थितियों से जोड़ा जाता है. मानसिक अशांति के लिए राहु और शनि की स्थिति देखी जाती है. हालांकि किसी एक ग्रह के आधार पर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता.
क्या ग्रह बदल सकते हैं नौकरी का भविष्य?
ज्योतिषीय मान्यताओं में ग्रह केवल संभावनाओं के संकेतक माने जाते हैं. नौकरी जाने, परीक्षा रद्द होने या सरकारी नियुक्ति पर संकट जैसी वास्तविक घटनाएं कानूनी, प्रशासनिक और संस्थागत फैसलों पर निर्भर करती हैं. इसलिए JPSC जैसी परिस्थितियों को ग्रहों का निश्चित परिणाम मानने के बजाय ज्योतिषीय दृष्टिकोण से संभावित संकेत के रूप में ही देखना चाहिए.
