Janmashtami Vrat Parana Time: जन्माष्टमी व्रत के बाद पारण का विधान शास्त्रों में बताया गया है. धर्मशास्त्र के अनुसार, जिस प्रकार पूजा में मुहूर्त का खास ख्याल रखा जाता है, उसी तरह पारण का समय और नियम का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. इस साल जन्माष्टमी व्रत का पारण कब किया जाएगा, सही समय क्या है और इसके लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, आइए जानते हैं.
जन्माष्टमी व्रत का पारण कब करें?
मिथिला और ठाकुर प्रसाद पंचांग के अनुसार, शनिवार 5 सितंबर को किया जाएगा. पारण के लिए शुभ समय सुबह 6 बजकर 01 मिनट है. कई जगहों पर निशिता काल की पूजा के बाद व्रत का पारण करने की परंपरा है. मध्यरात्रि के बाद पारण 12 बजकर 43 मिनट के बाद किया जा सकता है.
ये भी पढ़ें: आधी रात में ही क्यों हुआ था श्रीकृष्ण का जन्म? चंद्रमा और रोहिणी नक्षत्र से जुड़ा है रहस्य
जन्माष्टमी व्रत-पारण के नियम
शास्त्रों में जन्माष्टमी व्रत पारण को लेकर खास नियम बताए गए हैं. समाज में प्रचलित परंपरा के अनुसार, व्रत के अगले दिन सूर्योदय बाद पारण करना चाहिए. धर्मशास्त्र के जानकार मणिभूषण झा ने बताया कि जन्माष्टी का पारण सूर्योदय के बाद अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र समाप्त होने के बाद करना उचित है.
किन चीजों को खाकर करना चाहिए पारण?
जन्माष्टमी व्रत का पारण चरणामृत और तुलसी का सेवन करके करना चाहिए. इसके बाद श्रीकृष्ण को चढ़ाए गए प्रसाद का सेवन करना चाहिए. भगवान को अर्पित किए गए माखन-मिश्री, फल और धनिया पंजीरी का सेवन करके करना चाहिए. फल का प्रसाद सबसे पहले ग्रहण करना अच्छा माना गया है.
पारण के तुरंत बाद क्या न करें
जन्माष्टमी व्रत पारण के बाद तामसिक चीजें जैसे- लहसुन-प्याज, मांस और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा इस दिन अत्यधिक तले-भुने खाद्य पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि पारण के तुरंत बाद इन चीजों का सेवन करने से व्रत का शुभ फल प्राप्त नहीं होता.
ये भी पढ़ें: कृष्ण जन्माष्टमी पर घर में लड्डू गोपाल की स्थापना कैसे करें? जानें पूजा विधि
पारण के बाद तुरंत सोने से बचना चाहिए. कुछ देर तक भगवान का स्मरण, भजन या नाम जाप करना चाहिए. ऐसा करने से व्रत का शुभ फल प्राप्त होता है.
पारण के दिन व्रती को गुस्सा नहीं करना चाहिए. इस दिन भी वाणी पर संयम रखना चाहिए. किसी के लिए अपशब्दों प्रयोग नहीं करना चाहिए. मान्यतानुसार, ऐसा करने से व्रत निष्फल हो सकता है.
