Janki Jayanti 2026: हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती मनाई जाती है. इसे सीता अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सीता का धरती पर अवतरण हुआ था. वर्ष 2026 में जानकी जयंती 9 फरवरी को मनाई जाएगी.मान्यता है कि इस दिन जो भी भक्त विधि-विधान से सभी नियमों का पालन करते हुए माता सीता और प्रभु श्रीराम की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. वहीं, यदि इस दिन पूजा-पाठ में कोई भूल हो जाए, तो उसका अशुभ प्रभाव भी पड़ सकता है.
जानकी जयंती के दिन क्या करें?
- दान-पुण्य: इस दिन सुहागिन महिलाओं को सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां और लाल वस्त्र दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इसके अलावा अन्न और जल का दान भी फलदायी होता है.
- रामायण पाठ: घर में रामायण के सुंदरकांड या माता सीता के स्तोत्र का पाठ करें. इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.
- पीले वस्त्र पहनें: पूजा के दौरान पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि ये रंग प्रसन्नता और सौभाग्य के प्रतीक हैं.
- सात्विक भोजन: यदि इस दिन आप व्रत नहीं भी रख रही हैं, तब भी केवल सात्विक भोजन का ही सेवन करें. इससे मन शांत रहता है और सकारात्मकता बनी रहती है.
जानकी जयंती के दिन क्या न करें ?
- विवाद और कलह से बचें: इस दिन घर में किसी भी प्रकार का झगड़ा या वाद-विवाद न करें. विशेष रूप से जीवनसाथी के साथ विवाद से बचें.
- तामसिक भोजन न करें: इस दिन भूलकर भी मांस, मदिरा, लहसुन या प्याज का सेवन न करें. केवल सात्विक आहार ही ग्रहण करें.
- किसी का अपमान न करें: जानकी जयंती के दिन किसी का भी अपमान करना अशुभ माना जाता है.
- दिन में सोने से बचें: व्रत रखने वाले भक्तों को दिन में सोने से बचना चाहिए और समय को भजन-कीर्तन या माता सीता के ध्यान में लगाना चाहिए.
यह भी पढ़ें: Janaki Jayanti 2026: जानकी जयंती कब है? नोट करें तिथि, पूजा विधि और महत्व
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.
