Janki Jayanti 2026: जानकी जयंती को सीता अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. हर वर्ष फाल्गुन मास की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती मनाई जाती है. वर्ष 2026 में यह पर्व 9 फरवरी को मनाया जाएगा. यह दिन माता सीता के धरती पर अवतरण की खुशी में मनाया जाता है.मान्यता है कि इस दिन जो भक्त पूरे विधि-विधान से माता सीता की आराधना करता है और उनके मंत्रों का जाप करता है, उस पर माता की विशेष कृपा बनी रहती है. इससे जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता आती है. साथ ही वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और संबंध मजबूत होते हैं.
माता सीता के मंत्र
1. माता सीता का मूल मंत्र
“ॐ श्री सीतायै नमः”
महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सीता साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं. कहा जाता है कि जानकी जयंती के दिन इस मंत्र का जाप करने से परिवार में सुख-शांति और खुशहाली आती है.
2. वैवाहिक सुख के लिए मंत्र
“श्री जानकीरामाभ्यां नमः”
महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन जातकों के वैवाहिक जीवन में तनाव है या विवाह में बाधाएं आ रही हैं, उन्हें इस मंत्र का जाप करना चाहिए. माना जाता है कि इससे विवाह संबंधी समस्याएं दूर होती हैं.
3. सर्व बाधा मुक्ति मंत्र
“ॐ जानकीवल्लभाय स्वाहा”
महत्व: कहा जाता है कि यदि किसी व्यक्ति के जीवन में आर्थिक, पारिवारिक, सामाजिक या अन्य कोई समस्या चल रही हो, तो उसे इस मंत्र का जाप करना चाहिए. नियमित रूप से 108 बार जाप करने से जीवन की परेशानियों का नाश होता है, दरिद्रता दूर होती है और समृद्धि आती है.
4. सीता गायत्री मंत्र
“ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे, मिथिलेशकुमारी धीमहि. तन्नो सीता प्रचोदयात्॥”
महत्व: आध्यात्मिक चेतना और मानसिक शांति के लिए माता सीता के गायत्री मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है.
मंत्र जाप करते समय रखें ये सावधानियां
- स्पष्ट उच्चारण: मंत्रों का उच्चारण शुद्ध और स्पष्ट करें, गलत उच्चारण से सकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है.
- शुद्धता: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर ही जाप करें.
- सही आसन और दिशा: कुश या ऊनी आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखें.
- एकाग्रता और मौन: जाप के दौरान बातचीत न करें और ध्यान माता सीता की छवि पर केंद्रित रखें.
- सात्विकता: जाप के दिन सात्विक भोजन करें, प्याज-लहसुन से परहेज रखें और मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें.
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