Jamai Shashthi 2026: शनिवार को बंग समाज की ओर से पारंपरिक पर्व जमाई षष्ठी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा. पर्व को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. सुबह स्नान और पूजा-पाठ के बाद श्रद्धालु काली मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पूजा-अर्चना करेंगे. इस अवसर पर परिवारों में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का विशेष महत्व रहेगा.
देवी षष्ठी की पूजा और सुख-समृद्धि की कामना
घर-घर में सास देवी षष्ठी की विशेष पूजा करेंगी. पूजा के दौरान वे अपनी बेटी और दामाद की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करेंगी. यह पर्व रिश्तों में प्रेम और सम्मान को मजबूत करने का प्रतीक माना जाता है. बांग्ला संस्कृति में इसका विशेष धार्मिक महत्व भी है.
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बेटी-दामाद के स्वागत की अनोखी परंपरा
जमाई षष्ठी के अवसर पर नवविवाहित बेटियां अपने मायके पहुंचती हैं और दामादों का विशेष स्वागत किया जाता है. परंपरा के अनुसार सास दामाद के माथे पर दही का तिलक लगाती हैं और रक्षा सूत्र बांधती हैं. इसके बाद फल, मिठाइयां और उपहार देकर उन्हें आशीर्वाद दिया जाता है. वहीं बेटी और दामाद परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
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दामाद के लिए विशेष भोज का आयोजन
इस खास अवसर पर दामाद के लिए विशेष भोज भी तैयार किया जाता है. भोजन में पूड़ी, विभिन्न प्रकार की सब्जियां, पुलाव, मटन, मछली, दही और कई तरह की मिठाइयां शामिल रहती हैं. पंडित अशोक मुखर्जी के अनुसार शनिवार शाम छह बजे तक षष्ठी तिथि रहेगी, इसलिए पूरे दिन पूजा और उत्सव के लिए शुभ समय माना जाएगा.
