15 दिनों के एकांतवास के बाद भक्तों को मिले महाप्रभु के दर्शन, आज भाई-बहन संग मौसीबाड़ी की ओर प्रस्थान करेंगे जगन्नाथ

Jagannath Rath Yatra 2026: रांची के जगन्नाथ मंदिर में 15 दिनों के एकांतवास के बाद भगवान जगन्नाथ ने भक्तों को अलौकिक दर्शन दिए. नेत्रदान उत्सव और 108 दीपों की मंगल आरती के साथ रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ हुआ.

Jagannath Rath Yatra 2026: 15 दिनों के अनसर (एकांतवास) के बाद बुधवार को भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भक्तों के समक्ष प्रकट हुए. परंपरा के अनुसार भगवान के नेत्रदान संस्कार के बाद उनके दर्शन के लिए मंदिर के पट खोले गए. जैसे ही महाप्रभु के दर्शन शुरू हुए, मंदिर परिसर जय जगन्नाथ के उद्घोष से गूंज उठा. बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़े और पूरे वातावरण में भक्ति की अद्भुत छटा देखने को मिली.

108 दीपों की मंगल आरती ने बनाया आध्यात्मिक माहौल

शाम पांच बजे मंदिर के पट खोले गए और भगवान का विशेष श्रृंगार कर 108 दीपों से भव्य मंगल आरती की गई. इस अवसर पर भगवान को इलायची दाना, बादाम और मालपुआ का विशेष भोग अर्पित किया गया. भक्त दोपहर से ही मंदिर परिसर में जुटने लगे थे. मुख्य पुजारी रणेधर पांडेय ने अन्य पुजारियों के साथ विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई. रात तक श्रद्धालुओं का दर्शन और पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहा.

आज निकलेगी भव्य रथयात्रा, मौसीबाड़ी जाएंगे जगन्नाथ

गुरुवार तड़के चार बजे से श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए जाएंगे. दोपहर तक दर्शन का क्रम जारी रहेगा, जिसके बाद भगवान के विग्रहों को रथ पर विराजमान किया जाएगा. शाम पांच बजे भव्य रथयात्रा प्रारंभ होगी, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे. हजारों श्रद्धालु रथ को खींचकर इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनेंगे.


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नेत्रदान उत्सव के साथ शुरू हुआ रथ मेला

भगवान के नेत्रदान उत्सव के साथ ही रथयात्रा मेले की भी शुरुआत हो गई है. यह मेला 25 जुलाई तक चलेगा. मुख्य मंदिर से मौसीबाड़ी तक का मार्ग रंग-बिरंगी सजावट और रोशनी से सुसज्जित किया गया है. मेले में खान-पान, खिलौनों और विभिन्न घरेलू वस्तुओं की दुकानें सज चुकी हैं, जिससे श्रद्धालुओं और आगंतुकों में उत्साह का माहौल है.

महाप्रभु को लगेगा विशेष भोग

रथयात्रा के दिन भगवान को बाल भोग और अन्न भोग एक साथ अर्पित किए जाएंगे. परंपरा के अनुसार इस दिन मीठा पुलाव, मालपुआ, बुनिया, दक्षिणिका रोटी और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा. शाम को मौसीबाड़ी पहुंचने के बाद विशेष पूजा-अर्चना होगी और श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन का अवसर मिलेगा. रथयात्रा महोत्सव को लेकर पूरे शहर में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है.


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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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