लेखक: प्रो. मुश्ताक अहमद
प्राचार्य, सीएम कॉलेज, दरभंगा (बिहार)
International Yoga Day 2026: हर वर्ष 21 जून को विश्वभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है. यह केवल एक स्वास्थ्य गतिविधि नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की प्राचीन बौद्धिक और आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है. आज योग किसी धर्म, जाति या देश की सीमाओं में बंधा नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवन, मानसिक शांति और वैश्विक सद्भाव का माध्यम बन चुका है.
आधुनिक जीवन की चुनौतियों का समाधान
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इस बात की स्वीकृति है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव, बीमारियों और सामाजिक दबावों के बीच योग शरीर और मन के संतुलन का प्रभावी मार्ग प्रदान करता है. इसके महत्व को समझने के लिए योग के इतिहास, दर्शन और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को जानना आवश्यक है.
हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा
योग विश्व की सबसे प्राचीन ज्ञान और आध्यात्मिक परंपराओं में से एक माना जाता है. इसकी जड़ें भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन सभ्यता में निहित हैं. इतिहासकारों के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेषों में भी योग के प्रारंभिक संकेत मिलते हैं.
‘योग’ शब्द का वास्तविक अर्थ
“योग” शब्द संस्कृत की धातु “युज्” से बना है, जिसका अर्थ है जोड़ना या एकीकृत करना. इसका उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करना है. भारतीय दर्शन में योग को आत्मबोध और आध्यात्मिक उन्नति का साधन माना गया है.
महर्षि पतंजलि का अमूल्य योगदान
योग के सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप देने का श्रेय महर्षि पतंजलि को दिया जाता है. उनके द्वारा रचित ‘योगसूत्र’ में अष्टांग योग का वर्णन मिलता है, जिसमें नैतिक अनुशासन, शारीरिक अभ्यास, श्वास नियंत्रण और मानसिक एकाग्रता जैसे महत्वपूर्ण तत्व शामिल हैं.
केवल व्यायाम नहीं, जीवन जीने की कला
योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन-पद्धति है. भारतीय संस्कृति में इसे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ नैतिक और आध्यात्मिक विकास का माध्यम माना गया है.
सीमाओं से परे पहुंचा योग
समय के साथ योग ने भौगोलिक और धार्मिक सीमाओं को पार कर लिया. आज दुनिया के विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोग इसे स्वास्थ्य और कल्याण के दृष्टिकोण से अपना रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र से मिली वैश्विक मान्यता
दिसंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया. इस प्रस्ताव को रिकॉर्ड संख्या में देशों का समर्थन मिला. 21 जून को उत्तरी गोलार्ध का सबसे लंबा दिन होने के कारण भी विशेष महत्व दिया गया.
2015 में मनाया गया पहला योग दिवस
21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया. इस अवसर पर दुनिया के अनेक देशों में सामूहिक योग सत्र और स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम आयोजित किए गए.
विज्ञान ने भी माने योग के लाभ
आधुनिक चिकित्सा अनुसंधानों ने सिद्ध किया है कि नियमित योगाभ्यास से शरीर में लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और हृदय तथा श्वसन तंत्र बेहतर तरीके से कार्य करते हैं.
मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान
तनाव, चिंता, अनिद्रा और अवसाद जैसी समस्याओं के दौर में योग मानसिक शांति और सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यही कारण है कि कई चिकित्सा संस्थान इसे स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा मानते हैं.
दुनिया भर में बढ़ता प्रभाव
पिछले दशक में योग की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के कई देशों में योग केंद्र स्थापित हो चुके हैं और लाखों लोग इसका नियमित अभ्यास कर रहे हैं.
सांस्कृतिक संवाद का मजबूत माध्यम
योग ने विभिन्न देशों और संस्कृतियों के बीच संवाद और समझ को बढ़ावा दिया है. यह केवल स्वास्थ्य का साधन नहीं, बल्कि सभ्यताओं के बीच सम्मान और सहयोग का सेतु भी बन गया है.
तकनीकी युग में योग की प्रासंगिकता
आज की व्यस्त और तकनीक-प्रधान जीवनशैली में योग संतुलन की ओर लौटने का संदेश देता है. यह मनुष्य को अपने शरीर, मन और पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देता है.
वैश्विक सद्भाव का संदेश
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विभिन्न धर्मों, भाषाओं और राष्ट्रीयताओं के लोगों को एक मंच पर लाता है. इससे आपसी सम्मान, सहिष्णुता और शांति का वातावरण मजबूत होता है.
बहसों के बीच भी कायम लोकप्रियता
कुछ लोग योग को केवल व्यायाम मानते हैं, जबकि अन्य इसके आध्यात्मिक पक्ष पर जोर देते हैं. अलग-अलग विचारों के बावजूद इसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण इसके स्वास्थ्यवर्धक लाभ हैं.
स्वस्थ और संतुलित जीवन का मार्ग
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस एक ऐसी प्राचीन ज्ञान परंपरा की वैश्विक मान्यता का दिवस है जिसने समय और भूगोल की सीमाओं को पार कर लिया है. योग हमें याद दिलाता है कि सच्चा स्वास्थ्य केवल शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि मानसिक शांति, नैतिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का भी नाम है. योग का वैश्विक प्रसार इस बात का प्रमाण है कि मानवता की साझा सांस्कृतिक विरासत पूरी दुनिया के कल्याण का आधार बन सकती है.
(लेखक के मूल उर्दू लेख का हिंदी अनुवाद)
