आसमान का चांद कैसे बना भगवान शिव के जटाओं का गहना, जानें पौराणिक कथाओं में छुपा रहस्य
Bhagwan Shiv: क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव अपने बालों में चंद्रमा क्यों धारण करते हैं? अगर नहीं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है. पुराणिक कथाओं के माध्यम से हम जानेंगे कि भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने जटाओं में क्यों धारण किया.
Bhagwan Shiv: भगवान शिव को शंकर, महादेव, भोलेनाथ समेत कई अन्य नामों से जाना जाता है. भगवान शिव का हर रूप और उनसे जुड़ी हर चीज रहस्यों से भरी हुई है—चाहे वह उनके शरीर पर लगा भस्म हो या माथे पर सजा चंद्रमा. कई लोग मानते हैं कि भगवान शिव चंद्रमा को केवल एक आभूषण की तरह अपनी जटाओं में धारण करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. भगवान शिव और चंद्रमा से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं, और आज हम उनमें से एक कथा आपको बता रहे हैं.
पौराणिक कथा
कथाओं के अनुसार, देवताओं और असुरों ने मिलकर अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था. मंथन के दौरान समुद्र से कालकूट नामक विष निकला. यह विष इतना खतरनाक था कि इसकी एक बूंद ही पूरे संसार को नष्ट करने के लिए पर्याप्त थी. विष की उपस्थिति मात्र से देवता और असुर दोनों ही व्याकुल हो गए. तब भगवान शिव आगे आए और उस विष को अपने कंठ में ग्रहण कर लिया. लेकिन विष के प्रभाव से भगवान शिव का शरीर तपने लगा. यह देखकर चंद्रदेव और अन्य देवताओं ने उनसे आग्रह किया कि वे चंद्रमा को अपने सिर पर धारण करें, ताकि चंद्रमा की शीतलता उनके शरीर के ताप को कम कर सके. भगवान शिव ने उनका यह आग्रह स्वीकार किया और चंद्रमा को अपनी जटाओं में धारण कर लिया.
भगवान शिव के सिर पर सजा चंद्रमा किसका प्रतीक है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के सिर पर सजा चंद्रमा मन, नियंत्रण, समय और अमरता का प्रतीक है. यह उनके उग्र रूप के साथ संतुलन बनाए रखता है.
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