Hindu Marriage Rituals: शादियों में दूल्हे के सिर पर क्यों बांधा जाता है सेहरा? जानिए धार्मिक रहस्य

Hindu Marriage Rituals: भारतीय संस्कृति में विवाह परंपरा, आस्था और शुभ-संकेतों से जुड़ा पवित्र संस्कार है. शादी के हर पल में कोई न कोई धार्मिक रहस्य छिपे होते है चाहे दुल्हन का घूंघट हो या दूल्हे का सेहरा. आइए ज्योतिषाचार्य डॉ. श्रीपति त्रिपाठी जी से जानते हैं शादियों में दूल्हे के सिर पर क्यों बांधा जाता है सेहरा.

Hindu Marriage Rituals: हिंदू धर्म की शादियों में अलग-अलग रस्में निभाई जाती है, शादी में दुल्हन का चेहरा घूंघट से ढंक दिया जाता है, दूल्हे की सेहराबंदी की रस्म की जाती है, यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है, शादी के लिए तैयार करते समय दूल्हे को सेहरा बांधा जाता है, सेहरा आमतौर पर फूल, मोती, कुंदन, चमकीली व रेशमी धागे या कई बार तो सोने-चांदी की कलाकारी से बनता है, पगड़ी या सेहरे से दूल्हे का चेहरा ढका जाता है, सेहरे को आम बोलचाल की भाषा में मुकुट, विवाह मुकुट, किरीट और मउर भी कहा जाता है.

क्या है इस रस्म की मान्यता

इस रस्म के पीछे मान्यता ये है कि दूल्हे का चेहरा विवाह तक किसी को नहीं दिखना चाहिए ताकि उन पर किसी नकारात्मक ऊर्जा या बुरी नजर न पड़े, कुछ जगहों पर ये भी माना जाता है विवाह की रस्में पूरी होने तक दूल्हे और दुल्हन को एक-दूसरे का चेहरा देखना अपशकुन होता है.

पंचदेव से सुशोभित नर का दिव्य श्रृंगार

शास्त्रों में विवाह मुकुट या सेहरे को पंचदेव से सुशोभित नर का श्रृंगार कहा गया है, यही कारण है कि विवाह के समय आम लोग भी मुकुट या सेहरा पहनते हैं, शिव विवाह के प्रसंग में भगवान शिव द्वारा जटाओं का मुकुट और सांपों से मौर को सजाने का वर्णन मिलता है.

महादेव ने पहना था सांपों से बना मुकुट

जटा मुकुट अहि मउर संवारा’ चौपाई के माध्यम से ये बताया गया है कि भगवान शिव के गण उनकी जटाओं का मुकुट बना रहे हैं और उन्हें सांपों के मौर से सजाया जा रहा है, इससे पता चलता है कि मां पार्वती से विवाह के समय स्वयं महादेव ने सिर पर सांपों से बना मुकुट पहना था, इसलिए दूल्हे का चेहरा सेहरे से ढकने की परंपरा आदि काल से चली आ रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By JayshreeAnand

कहानियों को पढ़ने और लिखने की रुचि ने मुझे पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. सीखने और समझने की इस यात्रा में मैं लगातार नए अनुभवों को अपनाते हुए खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. वर्तमान मे मैं धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को नजदीक से समझने और लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >