Hartalika Teej: हरतालिका तीज हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि यह व्रत निर्जला रखा जाता है. इस दिन व्रती 24 घंटे तक अन्न-जल का सेवन नहीं करती हैं. यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है. हर साल यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है. सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ यह व्रत करती हैं. वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहे और योग्य पति की प्राप्ति के लिए इस व्रत को करती हैं.
क्यों रखा जाता है निर्जला व्रत?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए किया था. व्रत के दौरान वन में माता पार्वती ने अन्न और जल का पूर्ण त्याग कर रेत का शिवलिंग बनाकर कठोर तपस्या की. उन्होंने बिना जल की एक बूंद ग्रहण किए भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन रात्रि जागरण करते हुए भगवान शिव की आराधना की. उनकी इस निश्छल और कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया. इसी त्याग और निष्ठा की याद में महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं. धार्मिक मान्यता है कि निर्जला उपवास रखने से शरीर और मन शुद्ध होता है और माता पार्वती की तरह अटूट सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
हरतालिका तीज पर क्या करना होता है शुभ?
बालू या मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाएं
इस दिन सुबह स्नान के बाद बालू या मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान श्री गणेश की प्रतिमाएं बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है.
सोलह श्रृंगार करें
इस दिन सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है. सुहागिन महिलाओं को सुबह जल्दी स्नान कर सोलह श्रृंगार करके पूजा-अर्चना करनी चाहिए.
सुहाग सामग्री अर्पित करें
पूजा के दौरान माता पार्वती को सुहाग की सामग्री जैसे सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां और चुनरी समेत अन्य वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है.
कथा पाठ एवं रात्रि जागरण
पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनना फलदायक माना जाता है. इसके साथ ही पूरी रात भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना भी विशेष फलदायी माना गया है.
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