Hariyali Teej: सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का त्योहार मनाया जाता है. यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत विशेष होता है. विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में खुशहाली की कामना के लिए व्रत रखती हैं. इस दिन माता पार्वती और भोलेनाथ की पूजा की जाती है. इस पावन त्योहार के मौके पर मायके पक्ष से बेटी के ससुराल में 'सिंधारा' (या सिंजारा) भेजने की परंपरा है. आइए जानते हैं सिंधारा क्या है और इसमें कौन-कौन सी चीजें शामिल की जाती हैं.
सिंधारा क्या है?
'सिंधारा' तीज पर मायके से बेटी के लिए भेजा जाने वाला प्यार और आशीर्वाद का उपहार है. शादी के बाद तीज के मौके पर मायके से बेटी के लिए कपड़े, श्रृंगार का सामान, मिठाई और दूसरी जरूरी चीजें भेजी जाती हैं. यह परंपरा बेटी के प्रति माता-पिता के प्यार और अपनापन को दर्शाती है.
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सिंधारे की आवश्यक सामग्री सूची
- सुहाग और श्रृंगार: हरी चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, आलता, काजल, मेहंदी, महावर, बिछिया और पायल समेत अन्य सुहाग की चीजें शामिल की जाती हैं.
- बेटी के लिए वस्त्र: हरी या लाल साड़ी अथवा सूट भेजा जा सकता है.
- सास और ननद का सम्मान: बेटी की सास के लिए साड़ी और सुहाग सामग्री तथा ननद के लिए भेंट भेजने की भी परंपरा है. हालांकि, यह हर जगह अनिवार्य नहीं है. भारत के कुछ हिस्सों में ही इस तरह की परंपरा निभाई जाती है.
- मिष्ठान: अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार कोई भी मिठाई भेजी जा सकती है, जैसे फेणी, गुझिया, सुहाली आदि.
- फल: ताजे मौसमी फल भी सिंधारे में शामिल किए जा सकते हैं.
सिंधारे का महत्व
सिंधारा केवल सामान का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि बेटी भले ही विवाह के बाद ससुराल चली गई हो, लेकिन माता-पिता का स्नेह और आशीर्वाद हमेशा उसके साथ रहता है. इसके अलावा, मान्यता है कि मायके से आई सुहाग सामग्री का उपयोग कर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पति की दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
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