Neem Karoli Baba: भगवान हनुमान के परम भक्त माने जाने वाले नीम करोली बाबा का जीवन सादगी, सेवा और भक्ति से जुड़ा रहा है. आज देश-विदेश में उनके लाखों अनुयायी हैं और उत्तराखंड का कैंची धाम उनकी आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नीम करोली बाबा का असली नाम क्या था और लक्ष्मण नारायण शर्मा से वह नीम करोली बाबा कैसे बने? आइए, जानते हैं इससे जुड़ी प्रचलित कथा.
लक्ष्मण नारायण शर्मा कैसे बने नीम करोली बाबा?
नीम करोली बाबा के नाम को लेकर एक प्रसिद्ध कथा प्रचलित है. कहा जाता है कि एक बार बाबा ट्रेन में बिना टिकट यात्रा कर रहे थे. जब उन्हें उत्तर प्रदेश के नीम करोली स्टेशन पर ट्रेन से उतार दिया गया, तो ट्रेन आगे नहीं बढ़ी.
प्रचलित कथा के अनुसार, लोगों के आग्रह पर बाबा को दोबारा ट्रेन में बैठाया गया. इसके बाद ट्रेन चल पड़ी. उनके अनुयायी इस घटना को बाबा के नाम ‘नीम करोली’ से जोड़कर देखते हैं. हालांकि, यह घटना मुख्य रूप से भक्तों के बीच प्रचलित कथा है और इसे प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जाता.
नीम करोली या नीब करौरी, कौन सा नाम सही है?
बाबा को आमतौर पर नीम करोली बाबा के नाम से जाना जाता है, जबकि उनके गांव के नाम के आधार पर उन्हें नीब करौरी बाबा भी कहा जाता है. बताया जाता है कि बाबा ने उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के नीब करौरी गांव की एक गुफा में कठिन तपस्या की थी. इसी गांव के नाम पर स्थानीय लोग और भक्त उन्हें ‘नीब करौरी बाबा’ कहकर पुकारने लगे. समय के साथ यही नाम ‘नीम करोली बाबा’ के रूप में ज्यादा प्रचलित हो गया.
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