Guru Purnima 2026: सनातन धर्म में गुरु को ईश्वर के समान ही नहीं, बल्कि कई स्थानों पर भगवान से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है. यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा श्रद्धा, ज्ञान और गुरु-भक्ति का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. महर्षि वेदव्यास ने वेदों का विभाजन और महाभारत सहित अनेक ग्रंथों की रचना कर भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध बनाया. इसलिए इस दिन गुरु, माता-पिता और शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है.
पीले रंग का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र में पीला रंग देवगुरु बृहस्पति का प्रतीक माना गया है. बृहस्पति ज्ञान, विवेक, धर्म और समृद्धि के कारक ग्रह हैं. ऐसी मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन पीले वस्त्र धारण करने, हल्दी, चने की दाल, पीले फूल या पीले फल अर्पित करने से गुरु ग्रह की शुभता बढ़ती है. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा करते हैं कि जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति कमजोर होता है, उनके लिए इस दिन पीले रंग से जुड़े धार्मिक कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं.
भगवान विष्णु से जुड़ा है पीले रंग का संबंध
धार्मिक ग्रंथों में भगवान विष्णु को पीताम्बरधारी कहा गया है. वे पीले वस्त्र धारण करते हैं, जो पवित्रता, संरक्षण और दिव्यता का प्रतीक हैं. गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और गुरु की पूजा में पीले पुष्प, हल्दी, बेसन के लड्डू या अन्य पीले भोग अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु और गुरु दोनों की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.
ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है पीला रंग
धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से पीला रंग प्रकाश, बुद्धि, आशावाद और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. गुरु का कार्य शिष्य के जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाना है. यही कारण है कि गुरु पूर्णिमा पर पीले रंग का प्रयोग केवल परंपरा नहीं, बल्कि ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक भी माना जाता है. इस दिन पीले रंग का उपयोग व्यक्ति को सकारात्मक सोच, मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा की ओर प्रेरित करता है.
