Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि के सभी दिन करें माता दुर्गा की आरती, इस पूजा विधि से बनाएं अपने जीवन को शुभ और सफल

Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में नौ दिनों तक माता दुर्गा की आरती करने से घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. गुप्त नवरात्रि तंत्र-साधना और दस महाविद्याओं की उपासना के लिए विशेष मानी जाती है. जानिए माता दुर्गा की संपूर्ण आरती और इसका धार्मिक महत्व.

Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि के नौ दिन माता दुर्गा की आराधना के लिए बहुत खास माने जाते हैं. इन दिनों अगर रोज माता की आरती की जाए, तो घर में सुख-शांति बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. माना जाता है कि नियम से की गई पूजा और आरती से जीवन में समृद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक सोच बढ़ती है. गुप्त नवरात्रि क्यों होती है विशेष?

गुप्त नवरात्रि में गुप्त नवरात्रि का महत्व और भी बढ़ जाता है. ये नवरात्रि खास तौर पर तंत्र-साधना और देवी उपासना के लिए जानी जाती है. इन नौ दिनों में जो साधक श्रद्धा और नियमों के साथ माता दुर्गा की पूजा करता है, उसे जीवन की कई परेशानियों से राहत मिलती है। साथ ही आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति भी होती है.

दस महाविद्याओं की साधना का क्रम ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु के अनुसार, गुप्त नवरात्रि के दौरान दस महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व है.

दस महाविद्याओं की साधना का क्रम

ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु के अनुसार, गुप्त नवरात्रि के दौरान दस महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व है.

पहला दिन – मां काली

दस महाविद्याओं में मां काली प्रथम हैं। इनका स्वरूप जाग्रत और अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है.

दूसरा दिन – मां तारा

मां तारा तांत्रिक साधकों की प्रमुख देवी हैं। इनकी पूजा से भय और संकट दूर होते हैं.

तीसरा दिन – मां त्रिपुर सुंदरी

इस दिन मां त्रिपुर सुंदरी की आराधना की जाती है, जो सौंदर्य, प्रेम और आकर्षण की देवी हैं.

चौथा दिन – मां भुवनेश्वरी

संतान प्राप्ति और पारिवारिक सुख के लिए इनकी पूजा की जाती है.

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चतुर्थ संध्या – मां छिन्नमस्ता

इस समय मां छिन्नमस्ता की साधना करने से विद्या और सरस्वती कृपा प्राप्त होती है.

पांचवां दिन – मां त्रिपुर भैरवी

इनकी पूजा से जीवन के बंधन और बाधाएं दूर होती हैं.

छठा दिन – मां धूमावती

मां धूमावती की साधना से निडरता और आत्मबल बढ़ता है.

सातवां दिन – मां बगलामुखी

शत्रु बाधा, विवाद और विजय के लिए इनकी पूजा की जाती है.

आठवां दिन – मां मातंगी

गृहस्थ जीवन को सुखमय बनाने के लिए मां मातंगी की उपासना की जाती है.

नौवां दिन – मां कमलारानी

अंतिम दिन मां कमलारानी की पूजा होती है, जो दरिद्रता, गृहकलह और अशांति को दूर करती हैं.

दुर्गा माता की आरती ( Maa Durga Aarti)

||माँ दुर्गा की आरती||

“जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति ।
“तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥

“मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को ।
“उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥जय॥

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।
“रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥जय॥

केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी ।
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥जय॥

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥जय॥

शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥जय॥

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू।
बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥जय॥

भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी।
मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥जय॥

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती ।
श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥जय॥

श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै ।
कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ॥जय॥

मां अंबे जी की आरती

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,

तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।

तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी। दानव दल पर टूट पड़ो माँ करके सिंह सवारी॥

सौ-सौ सिहों से है बलशाली, अष्ट भुजाओं वाली, दुष्टों को तू ही ललकारती।

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता। पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥

सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली, दुखियों के दुखड़े निवारती।

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना। हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥

सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली, सतियों के सत को संवारती।

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली। वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥

मैया भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली, भक्तों के कारज तू ही सारती।

ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ | 12 साल का अनुभव
Mo- +91 8620920581

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लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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