Garud Puran: सनातन धर्म के 18 महापुराणों में से एक है गरुड़ पुराण. इसमें मनुष्य के जीवन, मृत्यु और उसके बाद की स्थितियों का विस्तार से वर्णन किया गया है. मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य है, लेकिन सनातन परंपरा में इसे अंत नहीं, बल्कि आत्मा की एक नई यात्रा की शुरुआत माना जाता है. इस यात्रा के दौरान मृतक से जुड़ी कई यादें और उनकी निजी वस्तुएँ पीछे छूट जाती हैं. इन्हीं निजी वस्तुओं में एक हाथ घड़ी भी शामिल है. अक्सर परिवारों में यह असमंजस बना रहता है कि किसी प्रियजन के निधन के बाद उनकी घड़ी को घर में रखना या पहनना चाहिए या नहीं. यदि उसे घर में रखा जाए, तो किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है? आइए, इस लेख के माध्यम से इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं.
घड़ी को घर में रखना चाहिए या नहीं?
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत व्यक्ति की हाथ घड़ी को सीधे तौर पर घर में रखना या उसका उपयोग करना अशुभ माना जाता है. इसके पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों कारण बताए गए हैं.
सूक्ष्म ऊर्जा और मोह का बंधन
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसका अपनी प्रिय वस्तुओं के प्रति मोह तुरंत समाप्त नहीं होता. घड़ी एक ऐसी वस्तु है, जो व्यक्ति के शरीर के सीधे संपर्क में रहती है और उसके जीवनकाल के समय की साक्षी होती है. मान्यता है कि मृत व्यक्ति की सूक्ष्म ऊर्जा उस घड़ी में लंबे समय तक बनी रह सकती है. यदि परिवार के सदस्य उसे अपने पास रखते हैं, तो आत्मा का सांसारिक मोह भंग होने में बाधा उत्पन्न हो सकती है.
नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अशांति
वास्तु शास्त्र और पुराणों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार, मृत व्यक्ति की घड़ी को घर में रखने या पहनने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है. इसके कारण परिवार के सदस्यों को:
- अज्ञात भय या उदासी महसूस हो सकती है.
- रात में डरावने सपने आ सकते हैं.
- कार्यों में रुकावटें और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है.
पितृ दोष की संभावना
शास्त्रों के अनुसार, यदि मृत व्यक्ति की वस्तुओं का उचित तरीके से निपटान न किया जाए, तो इससे आत्मा को कष्ट हो सकता है और परिवार को पितृ दोष जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
मृतक की घड़ी का क्या करना चाहिए?
यदि आपके किसी प्रियजन का निधन हो गया है और उनकी घड़ी आपके पास है, तो शास्त्रों के अनुसार आपके पास दो प्रमुख विकल्प हैं:
- दान करें: घड़ी को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें. ऐसा करने से मृतक की आत्मा को शांति मिलने और उनके मोह बंधन के समाप्त होने की मान्यता है.
- शुद्धिकरण के बाद सुरक्षित रखें: यदि आप उसे स्मृति-चिह्न के रूप में अपने पास रखना चाहते हैं, तो उसका सीधे उपयोग न करें. पहले उसे गंगाजल से शुद्ध करें, धूप-दीप दिखाएँ और किसी पवित्र स्थान पर रखें. यदि उसे पहनना ही हो, तो उसकी स्ट्रैप या कोई अन्य हिस्सा बदलवाकर तथा शुद्धिकरण पूजा कराने के बाद ही उपयोग करें.
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