लगने जा रहा है गंगा सागर मेला, जानें यहां स्नान का महत्व

Gangasagar Mela 2025: भारत के सभी तीर्थ स्थलों में गंगासागर को विशेष महत्त्व प्राप्त है. यह मान्यता है कि गंगासागर की तीर्थ यात्रा और पवित्र नदी में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए कहा जाता है, "सारे तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार." मकर संक्रांति के अवसर पर यहां एक बड़ा मेला भी आयोजित किया जाता है, जो हुगली नदी के किनारे लगता है.

Gangasagar Mela 2025: मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गंगा सागर की तीर्थ यात्रा और स्नान का अत्यधिक महत्व है. हिंदू धर्म में गंगा सागर को मोक्ष का स्थान माना गया है. इस पर्व पर लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं और मोक्ष की प्राप्ति की इच्छा के साथ सागर संगम में पुण्य स्नान करते हैं. मकर संक्रांति के दौरान गंगा-यमुना के किनारों पर मेले आयोजित होते हैं. देश का प्रसिद्ध गंगा सागर मेला भी इस अवसर पर आयोजित किया जाता है.

गंगा सागर मेला 2025

गंगा सागर मेला मकर संक्रांति से कुछ दिन पूर्व आरंभ होता है और पर्व के समापन के बाद समाप्त होता है. इस वर्ष मकर संक्रांति पर गंगा सागर में स्नान 14 जनवरी को होगा. वहीं, गंगा सागर मेला 10 जनवरी 2025 से प्रारंभ होकर 18 जनवरी 2025 तक चलेगा. इस अवधि में लाखों श्रद्धालु यहां आकर स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करेंगे.

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गंगा सागर स्नान का महत्व

मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा सागर में स्नान को अत्यधिक पुण्यकारी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन यहां स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. गंगा सागर में स्नान के पश्चात श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं और समुद्र में नारियल तथा पूजा सामग्री का समर्पण करते हैं. ऐसा विश्वास है कि मकर संक्रांति पर गंगा सागर में स्नान करने से इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. गंगा सागर का मेला हुगली नदी के उस किनारे पर आयोजित होता है, जहां गंगा नदी बंगाल की खाड़ी में मिलती है. यही संगम स्थल गंगा सागर के नाम से जाना जाता है.

मकर संक्रांति पर क्यों लगता है गंगासागर मेला

मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा सागर में स्नान का पौराणिक महत्व अत्यधिक है. पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता गंगा भगवान शिव की जटा से निकलकर धरती पर आईं, तब उन्होंने भागीरथ के साथ मिलकर कपिल मुनि के आश्रम में जाकर सागर में विलीन हो गईं. यह घटना संक्रांति के दिन हुई थी. मां गंगा के पवित्र जल से राजा सागर के साठ हजार शापित पुत्रों का उद्धार हुआ. इस महत्वपूर्ण घटना की स्मृति में गंगा सागर तीर्थ का नाम प्रसिद्ध हुआ. यहां हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर एक बड़ा मेला आयोजित किया जाता है. मान्यता है कि इस पवित्र दिन स्नान करने से 100 अश्वमेध यज्ञ करने के समान पुण्य की प्राप्ति होती है.

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Author: Shaurya Punj

शौर्य पुंज विशेष रूप से दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों एवं लेखों पर फोकस कर रहे हैं. वो डिजिटल मीडिया जगत के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. पाठकों की रुचि और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वे सरल, सहज और तथ्यपूर्ण धार्मिक एवं ज्योतिषीय कंटेंट तैयार करते हैं. डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ शौर्य खबरों की नब्ज को समझने और जटिल विषयों को आसान भाषा में प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांस लेखन से की थी. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में कार्य करने का अवसर मिला और अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन में काम शुरू किया. यहां उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट और मनोरंजन जगत की प्रमुख खबरों पर लेखन किया. साल 2020 के दौरान उन्होंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एजुकेशन और अन्य नॉन-न्यूज कैटेगरी में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. Health & Fitness, Beauty & Fashion, Relationship & Family, Food & Recipes, Travel, Astrology & Vastu, Career & Motivation, Festival & Culture जैसे विषयों पर उन्होंने सैकड़ों उपयोगी और जानकारीपूर्ण लेख तैयार किए. शिक्षा शौर्य पुंज का जन्म रांची, झारखंड में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की. पत्रकारिता की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें समाचार लेखन के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के आधार पर तथ्यपूर्ण, संतुलित और प्रभावी कंटेंट तैयार करने में सक्षम बनाती है. विशेषज्ञता के क्षेत्र दैनिक राशिफल साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल ज्योतिषीय उपाय पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान व्रत-त्योहार एवं शुभ मुहूर्त वास्तु शास्त्र धार्मिक मान्यताएं एवं परंपराएं लाइफस्टाइल एवं वेलनेस हेल्थ एवं फिटनेस डिजिटल कंटेंट राइटिंग एवं SEO पाठकों तक विश्वसनीय, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाना शौर्य पुंज की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता है.

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