Ganesh Utsav 2026: गणेश उत्सव में भगवान की पूजा में जरूरी हैं ये 7 नियम, जानें तारीख और मुहूर्त

गणेश उत्सव 2026 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इस साल 14-24 सितंबर तक चलने वाले उत्सव के लिए जानें पूजा के खास नियम, शुभ मुहूर्त, मूर्ति स्थापना की दिशा और गणपति को प्रिय भोग.

Ganesh Utsav 2026 Puja Niyam: पंचांग के अनुसार, इस साल गणेश उत्सव 14-24 सितंबर तक चलने वाला है. दस दिनों के गणेश उत्सव के दौरान प्रथम पूज्य गणपति की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि इस दौरान विधि-विधान से गणपति का पूजन करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही भगवान गणेश की कृपा से जीवन की विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं. शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश की पूजा में कुछ बातों का खास ध्यान रखा जाता है.

कब से कब तक है गणेश उत्सव 2026?

धार्मिक मान्यता का अनुसार, गणेश उत्सव की शुरुआत भाद्रपद यानी भादो शुक्ल चतुर्थी तिथि से होती है. जबकि इसका समापन भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (यानी अनंत चतुर्दशी) के दिन होता है.

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 14 को सुबह 7 बजकर 06 मिनट से हो रही है. वहीं, भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तिथि की समाप्ति 25 सितंबर को रात 11 बजकर 06 मिनट पर होगी. भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन 25 सितंबर को किया जाएगा. स्थानीय समय के अनुसार, चतुर्दशी तिथि के आरंभ और प्रतिमा विसर्जन के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.

गणेश चतुर्दशी 2026 शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 02 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. यानी इस साल गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न की पूजा के लिए 2 घंटे 28 मिनट का समय मिलेगा. हालांकि, स्थानीय समय के अनुसार, शुभ मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है.

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मूर्ति से जुड़े नियम

धर्मशास्त्र के अनुसार, गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश की पूजा के लिए पूजा स्थल पर मिट्टी की मूर्ति की स्थापना सबसे अच्छा माना गया है. इसके अलावा धातु की मूर्ति या तस्वीर लगाकर भी पूजन किया जा सकता है.

मिट्टी की मूर्ति या तस्वीर लेते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसमें गणेश जी की सूंड बाईं ओर हो. शास्त्रों में गणेश जी की वामावर्ती (बाईं ओर मुड़ा हुआ) सूंड वाली मूर्ति या तस्वीर सबसे शुभ मानी गई है.

कैसा होना चाहिए मूर्ति का स्वरूप?

गणेश उत्सव पर गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करते वक्त इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि उसमें गणपति का वाहन यानी चूहा और मोदक स्पष्ट रूप से नजर आए. शास्त्रीय नियम के अनुसार बैठी हुई मुद्रा में गणेश की प्रतिमा तस्वीर लगाना शुभ और मंगलकारी है.

किस दिशा में स्थापित करें मूर्ति या तस्वीर?

वास्तु नियम के मुताबिक, गणेश उत्सव के लिए भगवान गणेश की मूर्ति को पूर्व, उत्तर या पूर्व-उत्तर का कोण यानी ईशान में स्थापित करना चाहिए. इसके अलावा पूजन करने वाले का मुंह उत्तर की ओर होना शुभ माना गया है.

गणेश जी को प्रिय फूल

भगवान गणेश की पूजा में पीले या लाल रंग के फूलों का प्रयोग करना चाहिए. परंपरानुसार, इस दिन गुड़हल के फूल का प्रयोग करना उत्तम है. इसके अलावा गणपति की पूजा में दूर्वा (घास) को अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार, दूर्वा के बिना गणेश जी की पूजा अधूरी मानी जाती है. वहीं, गणेश की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग करने से बचना चाहिए.

गणपति को किन चीजों का लगाएं भोग

धर्म शास्त्र और धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान गणेश की पूजा में मोदक को जरूर शामिल करना चाहिए. पौराणिक मान्यता के अनुसार, गणेश जी को मोदक अत्यंत प्रिय है. मोदक के अलावा आप भगवान गणेश को मोतीचूर के लड्डू का भोग भी लगा सकते हैं.

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आरती से जुड़े नियम

आरती हमेशा खड़े होकर करना चाहिए. बाती रूई का होना चाहिए और उसमें घी या तिल के तेल का इस्तेमाल करना चाहिए. आरती की थाली को भगवान के चरणों में 4 बार, नाभि के पास 2 बार और चेहरे की तरफ एक बार घुमाना चाहिए. इस तरह कल 7 बार आरती की थाली को गोलाकार (बाएं से दाएं की ओर) घुमाना चाहिए.

आरती के दौरान दोनों हाथों से ताली बजाना चाहिए. साथ ही घंटी भी बचाना चाहिए. आरती पूरा होने के बाद हाथ जल लेकर दीपक पर तीन बार घुमाना चाहिए. इसके बाद खुद आरती लें और दूसरों को के लिए आगे बढ़ा दें.


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लेखक के बारे में

By दीपेश कुमार ठाकुर

दिपेश कुमार ठाकुर प्रभात खबर डिजिटल में धर्म और राशिफल सेक्शन लीड के तौर पर बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे अनुभव के दौरान उन्होंने धर्म-अध्यात्म, ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और न्यूमेरोलॉजी से जुड़े विषयों पर व्यापक लेखन किया है. उन्होंने Zee News, News24, Bharat Express, NDTV, Jansatta और Hari Bhoomi जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है. धर्म और ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों की रुचि के अनुरूप प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. उन्होंने संस्कृत साहित्य से स्नातक के साथ जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में मास्टर्स डिग्री हासिल की है.

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