Ganesh Chaturthi Special: गणेश चतुर्थी 2026 का पावन पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया गया. प्रभात खबर की ‘गणेश चतुर्थी स्पेशल’ सीरीज में हमारी अगली कहानी महर्षि वेदव्यास और गणेश जी के बीच हुई शर्त को लेकर है. यहां जानें उस पौराणिक कथा के बारे में.
गणेश जी को विद्या और बुद्धि का देवता माना जाता है. पौराणिक कथाओं में महाभारत के लेखन को इस प्रसंग का भी उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना की और इसके लेखन के लिए भगवान गणेश को अपना लेखक बनाया..
महाभारत के आदि पर्व की एक प्रचलित पाठ-परंपरा में जिक्र
महाभारत के आदि पर्व की एक प्रचलित पाठ-परंपरा में गणेश जी के लेखक बनने का प्रसंग मिलता है. महर्षि वेदव्यास ने ब्रह्मा जी के सामने महाभारत की रचना का उल्लेख किया. व्यास जी ने महाभारत को लिखने के लिए गणेश जी को लेखक बनाने का निर्णय लिया. कथा के अनुसार, व्यास जी ने गणेश जी से कहा "मैं महाभारत का ग्रंथ रचूंगा और तुम इसे लिखो. पर शर्त यह है कि तुम बिना रुके लिखो."
इस पर गणेश जी ने भी एक शर्त रखी और कहा, "मैं लिखूंगा, लेकिन मेरी शर्त यह है कि आप मेरे सामने श्लोक बोलते समय उन्हें बिना रुकावट और समझदारी से बोलें. यदि कोई श्लोक मुझे समझ में न आए, तो मैं रुक जाऊंगा." इस तरह से दोनों के बीच एक समझौता हुआ. प्रचलित पाठ में व्यास जी की इसी युक्ति का उल्लेख मिलता है कि वे बीच-बीच में कठिन श्लोक बोलते थे. उन्हें समझने में गणेश जी को कुछ समय लगता और इसी दौरान व्यास जी अगले श्लोकों की रचना कर लेते थे.
क्या गणेश जी ने अपना दांत तोड़कर महाभारत लिखी थी?
लोकप्रिय कथा में आगे बताया जाता है कि महाभारत लिखते समय गणेश जी की लेखनी टूट गई। लोकप्रिय कथा के अनुसार लेखन का क्रम रुकने से बचाने के लिए उन्होंने अपना एक दांत तोड़कर उसे लेखनी के रूप में इस्तेमाल किया और लेखन जारी रखा. इस लोकप्रिय कथा में गणेश जी के एक दांत के टूटने को उनके 'एकदंत' स्वरूप से जोड़ा जाता है.
इसलिए धार्मिक कथा के रूप में इसे इस तरह कहना अधिक उचित होगा कि “महाभारत की एक प्रचलित पाठ-परंपरा और भारतीय धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान गणेश ने महर्षि वेदव्यास के मुख से निकले महाभारत के श्लोकों को लिपिबद्ध किया.”
