Bakrid 2026: इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने जिलहिज्जा का चांद रविवार 17 मई की शाम देखा जाएगा. अगर चांद नजर आ जाता है तो ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार बुधवार 27 मई को मनाया जाएगा. वहीं, यदि चांद दिखाई नहीं देता है तो यह पर्व गुरुवार 28 मई को मनाया जाएगा. चांद देखने को लेकर मुस्लिम समुदाय और उलेमा किराम पूरी तरह मुस्तैद हैं.
चांद देखने की तैयारी पूरी
एदार-ए-शरिया झारखंड के नाजिमे आला मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने बताया कि रविवार को जिल-कादह 1447 हिजरी की 29वीं तारीख है और इस दिन चांद नजर आने की पूरी संभावना है. उन्होंने राज्यभर के लोगों से अपील की है कि वे ऊंची जगहों पर जाकर चांद देखने की कोशिश करें.
मौलाना ने मस्जिदों के इमामों, आलिमों, रुएत-ए-हिलाल कमेटियों और मस्जिद कमेटियों के जिम्मेदार लोगों से भी सतर्क रहने को कहा है. उन्होंने बताया कि यदि किसी इलाके में चांद दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय धार्मिक जानकारों और संबंधित रुएत-ए-हिलाल सेंटरों को दी जाए.
इन नंबरों पर दें चांद दिखने की सूचना
चांद नजर आने की जानकारी देने के लिए 9199780992, 6202583475 और 9835553380 नंबर जारी किए गए हैं. इन नंबरों पर संपर्क कर चांद की शहादत दी जा सकती है.
बकरीद पर क्यों दी जाती है कुर्बानी?
बकरीद का त्योहार हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है. मान्यता है कि अल्लाह के हुक्म पर उन्होंने अपने सबसे प्यारे बेटे की कुर्बानी देने का इरादा किया था. उनकी इस अटूट आस्था और समर्पण से खुश होकर अल्लाह ने बेटे की जगह एक जानवर कुर्बान करवा दिया.
इसी परंपरा को निभाते हुए मुस्लिम समुदाय बकरीद पर जानवर की कुर्बानी देता है. त्योहार से पहले लोग बकरे की देखभाल अपने बच्चों की तरह करते हैं और उससे भावनात्मक लगाव भी हो जाता है. इसके बाद अल्लाह का नाम लेकर कुर्बानी दी जाती है.
