Durga Puja 2026: रांची में श्रीश्री हरिसभा व दुर्गा पूजा समिति, दुर्गाबाड़ी की ओर से दुर्गा पूजा 2026 की आधिकारिक समय-सारिणी जारी कर दी गई है. बांग्ला पंचांग के अनुसार इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर होगा, जिसे परंपरागत मान्यताओं में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का संकेत माना जाता है. वहीं, देवी का गमन नाव पर होगा, जो सुख, समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार मां का शुभ गमन समाज में शांति, समृद्धि और खुशहाली का संदेश देता है.
पूजा की शुरुआत और दो दिन महासप्तमी का विशेष संयोग
दुर्गा पूजा का शुभारंभ 16 अक्तूबर को देवी बोधन, कल्पारंभ, आमंत्रण और अधिवास के साथ होगा. इस वर्ष पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण श्रद्धालुओं को लगातार दो दिन महासप्तमी पूजा का पुण्य लाभ मिलेगा. 17 अक्तूबर को 'नवपत्रिका' या 'कोला बो' का स्नान और प्रवेश होगा. नौ पवित्र पौधों से तैयार नवपत्रिका प्रकृति और नारी शक्ति के अद्भुत संगम का प्रतीक मानी जाती है. इसी दिन सुबह से चंडी पाठ, भोग, पुष्पांजलि, संध्या आरती और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा.
महाअष्टमी, महानवमी और संधि पूजा का कार्यक्रम
18 अक्तूबर को महासप्तमी की विशेष पूजा के साथ सुबह चंडी पाठ, भोग और पुष्पांजलि होगी. 19 अक्तूबर को प्रातःकाल संधि पूजा संपन्न होगी, जो अष्टमी और नवमी के संधिकाल की सबसे महत्वपूर्ण पूजा मानी जाती है. इसके बाद महाअष्टमी पूजा में कुमारी पूजा, भोग, पुष्पांजलि और संध्या आरती का आयोजन होगा. 20 अक्तूबर को महानवमी पूजा के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा की विशेष आराधना करेंगे. प्रतिदिन सुबह और शाम पूजा के उपरांत प्रसाद वितरण भी किया जाएगा.
विजयादशमी पर विसर्जन और शांति जल वितरण
21 अक्तूबर को विजयादशमी के अवसर पर सुबह पूजा, पुष्पांजलि और मंत्राग्निक विसर्जन की प्रक्रिया पूरी होगी. इसके बाद निर्धारित मुहूर्त में कलश विसर्जन, देवी का बेदी से अवतरण और शाम को प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा. प्रतिमा निरंजन के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच शांति जल का वितरण किया जाएगा. समिति ने सभी श्रद्धालुओं से निर्धारित समय के अनुसार पूजा में शामिल होकर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है.
यह जानकारी श्रीश्री हरिसभा व दुर्गा पूजा समिति, दुर्गाबाड़ी द्वारा जारी आधिकारिक पूजा कार्यक्रम और बांग्ला पंचांग में वर्णित धार्मिक परंपराओं के आधार पर तैयार की गई है. पूजा के समय और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन स्थानीय समिति के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया जाएगा.
