Premanand Ji Maharaj: हर एक इंसान की ज़िंदगी में पिता की अहम भूमिका होती है. पिता अपने बच्चों की ढाल बनकर हर स्थिति में उनके साथ खड़े रहते हैं—चाहे हालात अच्छे हों या बुरे. हर पिता चाहता है कि उसका बच्चा जीवन में सफल हो, आगे बढ़े और उससे भी बेहतर जीवन जिए.पिता के फैसले, व्यवहार और आदतें बच्चे के जीवन को गहराई से प्रभावित करती हैं. बच्चे अनजाने में ही पिता के आचरण से सीखते हैं. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पिता के बुरे कर्मों का असर बच्चों पर भी पड़ता है? आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब.
प्रेमानंद जी महाराज के विचार
इस विषय पर प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि पिता के बुरे कर्मों और पापों का दंड संतान को भी भुगतना पड़ता है. संतान को जीवन में दुख और कष्ट झेलने पड़ते हैं. इसी तरह, यदि संतान गलत रास्ते पर चलती है, तो उसका दंड पिता को भी सहना पड़ता है. जब संतान अधर्म या गलत आचरण करती है, तो समाज में पिता की निंदा होती है. उन्हें अपशब्द सुनने पड़ते हैं और उनके मान-सम्मान को ठेस पहुँचती है. अधर्म के रास्ते से कमाई गई हर वस्तु अंततः नष्ट हो जाती है.
प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि जो लोग गलत आचरण अपनाकर भी सुख भोगते हुए दिखाई देते हैं, वह उनके पिछले जन्म के पुण्य कर्मों का फल होता है. जिस दिन उनके पुण्य कर्म समाप्त हो जाते हैं, उसी दिन से जीवन में दुख, दर्द और कष्टों का सिलसिला शुरू हो जाता है.
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