Chaitra Pradosh Vrat 2026: 30 मार्च 2026 को चैत्र मास का अंतिम प्रदोष व्रत रखा जाएगा. यह व्रत प्रत्येक मास की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है. पूजा के अंत में हमेशा आरती की जाती है. बिना आरती के पूजा अधूरी मानी जाती है. मान्यता है कि आरती करने से वातावरण में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है.
॥ शिवजी की आरती ॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन, चतुरानन, पंचानन राजे।
हंसासन, गरूड़ासन, वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज, चार चतुर्भुज, दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला, वनमाला, मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी, कंसारी, कर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।
सनकादि, गरुणादि, भूतादि संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डलु, चक्र, त्रिशूलधारी।
सुखकारी, दुखहारी, जगपालन कारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव जानत अविवेका।
मधु-कैटभ दोनों मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
लक्ष्मी व सावित्री-पार्वती संगा।
पार्वती अर्धांगी, शिवलहरी गंगा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग, धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
॥ श्री शिव शंकरजी की आरती ॥
हर हर हर महादेव!
सत्य, सनातन, सुंदर, शिव सबके स्वामी।
अविकारी, अविनाशी, अज, अन्तर्यामी॥
हर हर हर महादेव!
आदि, अनंत, अनामय, अकल, कलाधारी।
अमल, अरूप, अगोचर, अविचल, अघकारी॥
हर हर हर महादेव!
ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर तुम त्रिमूर्तिधारी।
कर्ता, भर्ता, धर्ता, तुम ही संहारी॥
हर हर हर महादेव!
रक्षक, भक्षक, प्रेरक, प्रिय और दानी।
साक्षी, परमकर्ता, कर्ता अभिमानी॥
हर हर हर महादेव!
मणिमय भवन निवासी, अति भोगी, रागी।
सदा श्मशान विहारी, योगी वैरागी॥
हर हर हर महादेव!
छाल-कपाल, गरल-गल, मुण्डमाल व्याली।
चिता भस्मतन, त्रिनयन, अयन महाकाली॥
हर हर हर महादेव!
प्रेत-पिशाच-सेवित, पीत जटाधारी।
विवसन्, विकट रूपधर, रुद्र प्रलयकारी॥
हर हर हर महादेव!
शुभ्र-सौम्य, सुरसिंधु, शशिधर, सुखकारी।
अति कमनीय, शांतिकर, शिवमुनि मन-हारी॥
हर हर हर महादेव!
निर्गुण, सगुण, निरंजन, जगमय नित्य प्रभु।
कालरूप केवल हर! कालातीत विभु॥
हर हर हर महादेव!
सत्, चित्, आनन्द, रसमय, करुणामय धाता।
प्रेम-सुधा-निधि, प्रियतम, अखिल विश्व त्राता॥
हर हर हर महादेव!
हम अतिदीन, दयामय! चरण-शरण दीजै।
सब विधि निर्मल मति कर, अपना कर लीजै॥
हर हर हर महादेव!
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