Chaitra Navratri 2026: हिंदू ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब उस अवधि को खरमास कहा जाता है. यह समय लगभग एक महीने तक चलता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. ऐसा इसलिए माना जाता है क्योंकि इस समय सूर्य की स्थिति शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती.
खरमास में क्यों टाले जाते हैं मांगलिक कार्य?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य जब गुरु की राशियों धनु और मीन में होते हैं, तब उनका प्रभाव अपेक्षाकृत कमजोर माना जाता है. इसी कारण इस समय नए और स्थायी कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है. विवाह जैसे संस्कार जीवनभर के लिए होते हैं, इसलिए इन्हें ऐसे समय में करने से परहेज किया जाता है.
फिर नवरात्रि की पूजा क्यों की जाती है?
हालांकि खरमास में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, लेकिन देवी-देवताओं की पूजा, व्रत और साधना पर कोई रोक नहीं होती. नवरात्रि तो विशेष रूप से मां दुर्गा की आराधना और शक्ति साधना का पर्व है. शास्त्रों में बताया गया है कि इस दौरान पूजा-पाठ, जप, तप और भक्ति करना अत्यंत पुण्यदायी होता है. इसलिए यदि चैत्र नवरात्रि खरमास में भी पड़ जाए, तब भी माता दुर्गा की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है.
धार्मिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है नवरात्रि?
चैत्र नवरात्रि को देवी शक्ति की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है. इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखते हैं, कलश स्थापना करते हैं और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं. मान्यता है कि इस दौरान की गई पूजा से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है. इसलिए खरमास होने के बावजूद नवरात्रि की पूजा करना पूरी तरह शुभ माना जाता है.
ये भी पढ़ें: चैत्र नवरात्रि 2026: घर पर ऐसे करें कलश स्थापना, जानें पूजा की सही तिथि और नियम
खरमास में विवाह या अन्य मांगलिक कार्य भले ही नहीं किए जाते हों, लेकिन धार्मिक अनुष्ठान, पूजा और व्रत करने पर कोई रोक नहीं होती. यही कारण है कि जब चैत्र नवरात्रि इस अवधि में आती है, तब भी श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति के साथ मां दुर्गा की आराधना करते हैं.
