Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शक्ति की उपासना का उत्सव है. इस पर्व के दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है. नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है. मां महागौरी का वर्ण पूर्णतः श्वेत है, जिसकी तुलना शंख, कुंद के फूल या चंद्रमा से की जाती है. उनके वस्त्र और आभूषण भी श्वेत होते हैं, इसीलिए उन्हें ‘श्वेताम्बरधरा’ भी कहा जाता है. चार भुजाओं वाली मां का वाहन वृषभ (बैल) है. उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में डमरू है, जबकि अन्य दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में हैं. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता की पूजा करता है और व्रत कथा का पाठ करता है, उसके सभी पाप और दोष नष्ट हो जाते हैं तथा जीवन में खुशहाली आती है.
महाअष्टमी व्रत कथा: कठोर तप की शक्ति
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक अत्यंत कठिन तपस्या की थी. इस साधना के दौरान उन्होंने अन्न और जल का पूरी तरह त्याग कर दिया था, जिसके कारण धूप और धूल की वजह से उनका शरीर धीरे-धीरे बिल्कुल काला पड़ गया. उनकी अटूट श्रद्धा और कठोर तप से प्रसन्न होकर जब महादेव प्रकट हुए, तो उन्होंने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया. महादेव ने अपनी जटाओं से बहने वाली गंगा की पवित्र धारा से माता का अभिषेक किया.
गंगाजल के स्पर्श मात्र से माता के शरीर का सारा कालापन धुल गया और वे चाँद के समान धवल, उज्ज्वल और कांतिमान दिखाई देने लगीं. उनके इसी अत्यंत श्वेत और तेजस्वी स्वरूप के कारण उन्हें ‘महागौरी’ कहा जाने लगा. यह कथा हमें सिखाती है कि यदि हमारा संकल्प सच्चा हो और मन में धैर्य हो, तो हम कठिन से कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकते हैं.
माता महागौरी के मंत्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्.
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम्॥
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः.
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
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