Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च 2026 को शुरू हुआ चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है. कल यानी 26 मार्च को नवरात्रि का आठवां दिन है, जिसे महाअष्टमी के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा. यह दिन नवदुर्गा के आठवें स्वरूप, मां महागौरी को समर्पित है. मान्यता है कि मां महागौरी की पूजा करने से भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं और उन्हें अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.
मां महागौरी का दिव्य स्वरूप
मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत सौम्य, शांत और प्रकाशमान है. इनके नाम का अर्थ ही इनकी विशेषता को दर्शाता है ‘महा’ यानी अत्यंत और ‘गौरी’ यानी श्वेत वर्ण. इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, जिसकी तुलना शंख और कुंद के फूल से की जाती है. मां श्वेत वस्त्र और आभूषण धारण करती हैं और वृषभ (बैल) पर सवार होती हैं, इसलिए इन्हें ‘वृषारूढ़ा’ भी कहा जाता है.
इनकी चार भुजाएं हैं. दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और त्रिशूल, जबकि बाएं हाथ में डमरू और वरमुद्रा सुशोभित है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, कठिन तपस्या के कारण मां का शरीर काला पड़ गया था, लेकिन जब महादेव ने प्रसन्न होकर उन पर गंगाजल छिड़का, तो वे विद्युत के समान अत्यंत कांतिवान और गौर वर्ण की हो गईं. तभी से उन्हें महागौरी कहा जाने लगा.
महाअष्टमी 2026: शुभ मुहूर्त
- अष्टमी तिथि प्रारंभ: 25 मार्च 2026, दोपहर 01:50 बजे से
- अष्टमी तिथि समाप्त: 26 मार्च 2026, सुबह 11:48 बजे तक
- पूजन और व्रत का समय: उदया तिथि के अनुसार 26 मार्च को महाअष्टमी का पूजन और व्रत किया जाएगा.
कन्या पूजन शुभ मुहूर्त
- पहला मुहूर्त: सुबह 06:18 से 07:50 तक
- दूसरा मुहूर्त: सुबह 10:55 से दोपहर 03:31 तक
प्रिय फूल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता महागौरी को सफेद रंग के फूल जैसे मोगरा, चमेली या सफेद कनेर अत्यंत प्रिय हैं. ऐसे में इस दिन सफेद फूल अवश्य अर्पित करें.
मुख्य भोग
मान्यता है कि माता को नारियल या नारियल से बनी मिठाइयां, हलवा-पूरी का भोग प्रिय है. कहा जाता है कि इनके अर्पण से मां महागौरी प्रसन्न होती हैं और भक्तों को आशीर्वाद देती हैं.
शुभ रंग
माना जाता है कि मां को गुलाबी और मोरपंखी हरा रंग बेहद पसंद है. इसलिए महाअष्टमी के दिन गुलाबी या हरे रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है.
मां महागौरी के मंत्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥
श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
कन्या पूजन विधि
अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है. 2 से 10 वर्ष तक की 9 कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर घर बुलाया जाता है. उनके पैर धोकर सेवा की जाती है. इसके बाद उन्हें आसन पर बैठाकर आलता लगाया जाता है, चुनरी ओढ़ाकर उनका श्रृंगार किया जाता है. इसके बाद उन्हें भोजन कराया जाता है. इस दिन विशेष रूप से हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद बनाकर कन्याओं को खिलाया जाता है. अंत में दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है.
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