Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक है. साल 2026 में यह त्योहार 19 मार्च से शुरू हुआ है, जिसका समापन 26 मार्च को होगा. यह पर्व नौ दिनों तक चलता है. इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की आराधना का विधान है. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है.
मां चंद्रघंटा का स्वरूप
मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र की आकृति होती है, जो घंटी के आकार जैसी दिखाई देती है. इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. देवी का यह स्वरूप शांति और वीरता का प्रतीक माना जाता है. माता सिंह की सवारी करती हैं. मां की 10 भुजाएं हैं, जिनमें वे खड्ग, धनुष, बाण और त्रिशूल जैसे अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं.
मां चंद्रघंटा का प्रिय भोग
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. खासकर खीर, दूध से बने पेड़े या सफेद मिठाई अर्पित करने से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं.
पूजा में चढ़ाने वाले फूल
मां चंद्रघंटा को गेंदा (मैरीगोल्ड) के फूल अति प्रिय माने जाते हैं. इसके अलावा कमल या सफेद पुष्प भी अर्पित किए जा सकते हैं. फूल अर्पित करते समय सच्चे मन से प्रार्थना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.
शुभ रंग क्या है?
नवरात्रि के तीसरे दिन का शुभ रंग ग्रे माना जाता है. इस रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में स्थिरता आती है.
पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक के अंदर साहस, आत्मविश्वास और निर्भयता का विकास होता है. साथ ही जीवन की सभी नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है.
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